*पुरातत्व विभाग व जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते 12वीं शाताब्दी के मूर्ति का नही हो सका जीर्णोद्धार*

*पुरातत्व विभाग व जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते 12वीं शाताब्दी के मूर्ति का नही हो सका जीर्णोद्धार*

*पगडंडी पहुँच मार्ग पर होना चाहिए था सड़क का निर्माण प्रचार प्रसार के लिए लगाने चाहिए शाइन बोर्ड*

*लोक कलाकार खिरेंद्र यादव ने जिला कलेक्टर को लिखा पत्र*

भरत भारद्वाज ✍️

कोण्डागांव– जिला मुख्यालय से महज 20 किमी दूर नारायणपुर मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत पाला के अंतर्गत घने जंगलों के बीच पाहाडी के उपर विराज है भगवान नरसिंह देव।
वैसे पुरातत्व विभाग द्वारा बताए अनुसार यह मुर्ति 12वीं 13वीं शताब्दी की बताई जा रही है।तब से आज तक कई सावन -कितने जेठ झेल चुकी है यह मुर्ति ।
यह मूर्ति पहाड़ी के ऊपर कर्पन नुमा (गुफा) पर यहां जलहरि मे स्थापित है। किसने इसको स्थापित किया इसका पुर्ण प्रमाण अब तक नहीं मिल सका है।
वैसे गांव वालों का कहना है जब से हम देख रहे हैं तब से आज तक या मूर्ति यहां पर विराजमान है । वैसे यह मूर्ति को हम ग्रामवासी गुंशी डोकरा या मोटका डोकरा के नाम से जानते हैं । एंव इसी नाम से बुलाते हैं बस्तर की मान्यता के अनुसार ग्रामवासी जब यहां जाते हैं स्वेच्छा अनुसार रुपए पैसे या आंवले के पत्ते को जरूर चढ़ाते हैं ।
यहां पहुंच मार्ग नहीं होने के कारण जिसे मालूम है वह तो यहां आ जाता है देख कर चला जाता है मगर जिसे मालूम नहीं है यहां तक नहीं पहुंच पाता । क्योंकि घने जंगलों के बीच प्रचार-प्रसार के अभाव में इस मूर्ति को आज भी कई लोग नही जानते । यदि शासन चाहती तो यहां तक पहुंचने के लिए पहुंचमार्ग बनाकर लोगों को सुलभ करा देती ।
पहाड़ी पर विराजे नरसींह देव की मूर्ति किसी समय अपने पूर्ण रूप में देखे जाते थे । मगर पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते अब यह मूर्ति खंडित हो चुकी है। क्योंकि कुछ लोगों का कहना है कुछ शरारती तत्व के द्वारा वशीकरण के नाम से इस मूर्ति को घसकर उसे पूर्ण रूप से खंडित किया जा चुका है।
इस मामले में कोंडागांव जिले के लोक कलाकार खिरेंद्र यादव ने जिला प्रशासन के ध्यान आकर्षन के लिए जिले के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। खिरेंद्र यादव लोक कलाकार होने के नाते यह चाहते हैं कि इस 12 वीं शाताब्दी की दुर्लभ मूर्ति को लोग जाने प्रशासन इसके पहुँच मार्ग में सड़क का निर्माण एवं इसका प्रचार प्रसार के लिए बोर्ड व मूर्ति की रख रखाव की अच्छी सुविधा उपलब्ध हो सके जिससे पर्यटकों को भी इस मूर्ति का दर्शन आसानी से हो सकेगा।

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