बस्तर दशहरा की परंपराओं व आस्था से खिलवाड़: कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष सुशील मौर्य ने भाजपा सरकार और प्रशासन पर साधा तीखा निशाना

चंद्रहास वैष्णव

ऐतिहासिक 75 दिनी बस्तर दशहरा में अव्यवस्था, परंपरा टूटने और मुरिया दरबार को सीमित करने का लगाया गंभीर आरोप; निष्पक्ष जांच और मुआवजे की उठाई मांग

विश्वविख्यात एवं 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के समापन के बाद कांग्रेस ने आयोजन की व्यवस्थाओं और परंपराओं के निर्वहन को लेकर राज्य की भाजपा सरकार तथा दशहरा समिति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कांग्रेस भवन में आयोजित एक संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का दावा करने वाली सरकार की नाक के नीचे बस्तर के 600 साल पुराने रीति-रिवाजों और जनआस्था के साथ घोर खिलवाड़ किया गया है।

##रथ हादसे, कथित लाठीचार्ज और जेसीबी के इस्तेमाल पर खड़े किए सवाल##
सुशील मौर्य ने कहा कि दशहरा के दौरान रथ परिक्रमा के वक्त पहिया टूटने के बाद विरोध दर्ज कराने वाले रथ खींचने वालों पर कथित रूप से लाठीचार्ज कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सदियों पुरानी परंपरा को दरकिनार करते हुए जेसीबी मशीन से रथ खिंचवाया गया, जो बस्तर की संस्कृति का अपमान है। इसके साथ ही रथ संचालन के दौरान जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रितों और घायलों को अब तक उचित मुआवजा न दिए जाने पर उन्होंने कड़ा रोष जताया और कहा कि शासन-प्रशासन का कोई प्रतिनिधि पीड़ित परिवार की सुध लेने तक नहीं पहुंचा।

##बस्तर की संसद ‘मुरिया दरबार’ की गरिमा घटाने का आरोप##
प्रेस वार्ता में मौर्य ने कहा कि बस्तर की परंपरा में मुरिया दरबार को ‘बस्तर की संसद’ का दर्जा प्राप्त है, जहां दूर-दराज से आए मांझी, चालकी, पुजारी और आम ग्रामीण शासन के सामने अपनी समस्याएं रखते हैं। आरोप लगाया गया कि वीआईपी प्रोटोकॉल के नाम पर इस ऐतिहासिक दरबार को महज 8 मिनट में समेट दिया गया और पूरी प्रक्रिया को स्क्रिप्टेड बना दिया गया। इसके अलावा सिरहासार भवन से पारंपरिक कारीगरों व ग्रामीणों को सफाई के नाम पर जबरन हटाए जाने का भी विरोध किया गया।

##काछनगादी रस्म व मानदेय में उपेक्षा का मुद्दा उठाया##
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने काछनगादी विधान को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक सेवादारों और पनका समाज की भावनाओं को आहत किया गया। उन्होंने आगे कहा कि मांझी-चालकी के मानदेय बढ़ोतरी की बात तो कही गई, लेकिन 21 रियासतकालीन मंदिरों के पुजारियों, मेंबर-मेंबरीन और कोटवारों के मानदेय की अनदेखी कर दी गई। साथ ही बस्तर संभाग के अन्य वरिष्ठ विधायकों व विपक्षी जनप्रतिनिधियों को आयोजन से दूर रखने का आरोप लगाया।

##निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग##
अंत में सुशील मौर्य ने कहा कि मां दंतेश्वरी की पावन धरा पर परंपराओं से हुआ यह समझौता बस्तरवासी कभी स्वीकार नहीं करेंगे। कांग्रेस पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परंपराओं की अनदेखी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व नेताओं पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

##बस्तर दशहरा में वीवीआईपी प्रोटोकॉल मुख्यमंत्री तक सीमित रखने की मांग: मौर्य##
बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक अस्मिता और सदियों पुरानी परंपराओं के संरक्षण को लेकर मौर्य ने वीवीआईपी प्रोटोकॉल को केवल प्रदेश के मुख्यमंत्री तक सीमित रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा पूरे बस्तर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्व है, जिसे देखने दूर-दराज के गांवों से ग्रामीण, पर्यटक और आम नागरिक पहुंचते हैं।

मौर्य ने कहा कि वीवीआईपी प्रोटोकॉल के नाम पर मार्ग बंद होने और प्रतिबंध लगाए जाने से आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग महत्वपूर्ण रस्मों और रीति-रिवाजों को करीब से देखने से वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके साथ आम जनता की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। बस्तर दशहरा सबका पर्व है, इसलिए सभी को इसकी अनूठी परंपराओं को देखने और समझने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।