*आजादी के जश्न में डूबा देश, पर बालोद नगर पालिका ने शहर को धकेला अंधेरे में: स्वतंत्रता दिवस की शाम स्ट्रीट लाइटें गुल, जिम्मेदार बेपरवाह*

विनोद जैन

 

बालोद – बालोद नगर पालिका प्रशासन भी अपने नए नए कारनामो से चर्चा मे बने रहने की पूरी कोशिश करता नजर आता हैँ एक तरफ पूरा देश जहां 15 अगस्त के पावन पर्व पर देशभक्ति के उल्लास के साथ आजादी का जश्न मना रहा था वहीं शहर के अनेक शासकीय स्थलों कार्यालयों मे रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमगा रहा था , तो वहीं दूसरी ओर बालोद नगर पालिका की घोर लापरवाही ने राष्ट्रीय पर्व के दिन ही शहर को अंधेरे के आगोश में धकेल दिया।

राष्ट्रीय पर्व के मौके पर जहां शासकीय भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था की जाती है, वहीं बालोद की सड़कों पर छाया यह अंधेरा नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर रहा है। लोगो का कहना था की एक तरफ सड़को मे फैला अंधेरा दूसरी तरफ शहर की सड़के गौठान बनी हुई हैँ जहाँ पशुधन सड़को पर बैठे नजर आते हैं ऐसे मे गंभीर दुर्घटना भी घट सकती है

लाखों रुपये के बजट और मेंटेनेंस के दावों के बावजूद स्वतंत्रता दिवस जैसे गरिमामयी अवसर पर बिजली गुल रहना यह साफ दर्शाता है कि जिम्मेदार अधिकारियों को राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और आम जनता की सुविधाओं की कोई परवाह नहीं है।

नगर पालिका का यह नया वित्तीय मॉडल सचमुच बेमिसाल है—अब तो ऐसा जनता का कहना हैँ की सड़कें रहेंगी अंधेरी, पानी रहेगा मैला, लेकिन 22% के मुनाफे और ₹39 के मनमाने दर से भरा रहेगा झोला।’