चंद्रहास वैष्णव 
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में खून-पसीना एक कर दो जून की रोटी कमाने वाले गरीब मजदूरों के साथ बस संचालकों और उनके कर्मचारियों की अमानवीयता रुकने का नाम नहीं ले रही है। प्राइवेट बस माफियाओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब ये खुलेआम मजदूरों के साथ बदसलूकी, गाली-गलौज और लूटपाट पर उतर आए हैं।
*अमिश ट्रेवल्स के कर्मचारियों की शर्मनाक करतूत*
ताजा और बेहद शर्मनाक मामला जगदलपुर के पुराने बस स्टैंड का है, जहां अमीश ट्रेवल्स’ के कर्मचारियों की गुंडागर्दी खुलकर सामने आई है। पीड़ित मजदूरों ने अपना आक्रोश जताते हुए बताया है कि हैदराबाद से वापसी के दौरान बस कर्मचारियों द्वारा उनके साथ जानवरों जैसा सलूक किया जाता है।
मजदूरों का सीधा आरोप है कि:
हैदराबाद में उन्हें जबरन और भद्दी गालियां देकर बसों में ठूंसा जाता है।
जब कोई मजदूर इस तानाशाही का विरोध करता है, तो उसके साथ सरेआम बदसलूकी और लूटमारी की जाती है।
कई बार अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए, बस संचालकों द्वारा इन बेबस मजदूरों को बीच रास्ते में ही धक्के मारकर उतार दिया जाता है।
##पुलिस की चुप्पी और लचर कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में
यह कोई पहला मामला नहीं है जब जगदलपुर में बस ऑपरेटरों की दबंगई का शिकार गरीब मजदूर हुए हों। पहले भी ऐसी कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर खड़ा होता है।
लगातार हो रही इन अमानवीय घटनाओं के बावजूद पुलिस की कार्रवाई हमेशा खानापूर्ति तक सीमित क्यों रह जाती है? पुलिस की यह उदासीनता और लचर रवैया पूरी तरह से संदेह के घेरे में है। यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या बस माफियाओं के रसूख और धनबल के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं? या फिर इन मजलूमों की चीखें वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारियों तक नहीं पहुंच पातीं?
##सख्त कार्रवाई की दरकार
अपने ही प्रदेश और शहर में मजदूरों के साथ हो रहा यह बर्ताव सुशासन के दावों पर एक करारा तमाचा है। अब वक्त आ गया है कि जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और उच्चाधिकारी इस मामले का स्वतः संज्ञान लें।
ऐसे बेलगाम बस संचालकों और उनके कर्मचारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर उनके परमिट रद्द किए जाने चाहिए। जब तक इस गुंडागर्दी के खिलाफ कोई कड़ा और दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाता, तब तक गरीब मजदूरों का यह शोषण रुकने वाला नहीं है।
