यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर 
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में आयोजित विशेष बैठक के निर्णयों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में टेट (TET) की अनिवार्यता को नियम विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक और मिडिल स्कूलों के शिक्षक इस उम्मीद में थे कि विभाग उनकी रुकी हुई पदोन्नति को पूर्ण करने के लिए विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करने का ठोस निर्णय लेगा, लेकिन इसके विपरीत टेट की आड़ में पदोन्नति में नई बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।
नियमों में परस्पर विरोध- वर्तमान में प्रभावी शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति नियम में पदोन्नति के लिए टेट (TET) की कोई अनिवार्यता नहीं है। विभाग की बैठक में इसे अनिवार्य बताना और भर्ती नियमों से इतर निर्देश जारी करना परस्पर विरोधी और शिक्षकों के साथ अन्याय है।
2028 तक का समय सीमा प्रावधान- शिक्षकों को टेट (TET) उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक की समय सीमा दी गई है, ऐसे में 2028 से पूर्व होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया में टेट के नाम पर वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार करना पूरी तरह अनुचित है, जिससे भविष्य में गंभीर न्यायिक जटिलताएं और कोर्ट केस की स्थिति बनेगी।
वरिष्ठता के आधार पर तत्काल हो पदोन्नति- एसोसिएशन मांग करता है कि वर्तमान में सेवा-वरिष्ठता सूची के आधार पर शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया तुरंत पूरी की जावे और उन्हें वर्ष 2028 तक टेट उत्तीर्ण करने का समय व निर्देश दिया जावे।
विभागीय टेट परीक्षा का हो आयोजन- शिक्षकों को अवसर प्रदान करने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा तत्काल विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का आयोजन किया जावे ताकि सभी पात्र शिक्षक इसमें शामिल हो सकें।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश महासचिव हेमेंद्र साहसी, जिलाध्यक्ष स्वदेश शुक्ला जिला सचिव संतोष जायसवाल ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों से परे जाकर शिक्षकों के पदोन्नति अधिकारों का हनन किया गया, तो प्रदेश भर के शिक्षक इसका कड़ा विरोध करेंगे, विभाग को चाहिए कि वह विसंगतियों को दूर कर वरिष्ठता क्रम में शीघ्र अति शीघ्र पदोन्नति आदेश जारी करे।
