विनोद जैन 
बालोद – नगर पालिका परिषद बालोद में नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाने का एक और बड़ा नमूना सामने आया है।
किसी आउटसोर्स कर्मचारी के पत्र को आधार बनाकर ₹5.00 लाख या उससे अधिक का क्रय प्रस्ताव स्वीकृत करना प्रशासनिक प्रणाली का खुला मज़ाक है।
इस व्यवस्था से सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या नगर पालिका के जिम्मेदार उच्च अधिकारी खुद को वैधानिक और वित्तीय दायित्वों से बचाने के लिए निचले कर्मचारियों के कंधे का इस्तेमाल कर रहे हैं?
गंभीर सवाल: जब शासकीय धन का व्यय किया जा रहा था, तब किसी नियमित अधिकारी/अभियंता ने खुद आगे बढ़कर मांग पत्र जारी क्यों नहीं किया?
आउटसोर्स कर्मचारी के पत्र को शासकीय रिकॉर्ड की नोटशीट में मुख्य आधार बनाना किस प्रशासनिक नियमावली के अंतर्गत आता है?
आगे है, क्रय समिति के गठन पर उठे गंभीर सवाल: गैर-तकनीकी हाथों में लाखों के टेंडर और गुणवत्ता की कमान!
