विनोद जैन 
बालोद :- 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 के जिला स्तरीय आयोजन हेतु राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एन. सी.एस. टी. सी.) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा चयनित मुख्य कथानक “Science and Innovation for Sustaonability” पर जिला के शिक्षको की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सेजेस विद्यालय हाल में किया गया |
जिला स्तरीय इस कार्यशाला में भाग लेने जिला बालोद के विभिन्न स्कूल के लगभग 300 माध्यमिक एवं हायर सेकेंडरी के शिक्षक सम्मिलित हुए
32 वी राष्ट्रीय बाल विज्ञान
कांग्रेस एनसीएससी के तहत जिले के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की भावना और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला बालोद में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम एवं उप-विषयों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
सतत विकास के लिए विज्ञान और नवाचार पर रहा विशेष फोकस इस वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की मुख्य थीम साइंस एंड इनोवेशन पर
विशेषज्ञों ने दी परियोजना निर्माण की जानकारी दि
कार्यशाला में मुख्य विषय एवं उपविषयों पर विस्तृत चर्चा जिला समन्वयक बी एन योगी ने प्रदान किया जिला अकादमिक समन्वयक कादम्बिनी यादव ने ऑनलाइन पंजीयन और प्रोजेक्ट आइडिया पर प्रकाश डालते हुए संचालन किया एवं गाइड टीचर जयन्ती राय ने प्रोजेक्ट निर्माण एवं मूल्यांकन पर विस्तार से बताया |कार्यशाला में शिक्षकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के उद्देश्य, परियोजना चयन, शोध पद्धति तथा प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।
विषय विशेषज्ञों द्वारा सभी पांच उपविषय पर बहुत ही गहराई से चर्चा करते हुए प्रोजेक्ट को सम्मिलित करने पर जोर दिया गया जिला स्तर पर वर्कशाप एवं प्रोजेक्ट प्रस्तुतिकरण माह अगस्त से सितंबर में किया जाएगा, सभी को ऑनलाइन पंजियन करना अनिवार्य होगा , इसके लिए शिक्षकों का एक दिवसीय कार्यशाला कराया गया |पहले भी इसमे सहभागी जिला के स्कूल है जिनके विद्यालय द्वारा नेशनल स्तर तक अपना परचम लहराया हैं | तथा राज्य वैज्ञानिक का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं |
विद्यार्थियों में नवाचार की भावना
विकसित करने का आह्वान
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार की भावना विकसित करने का प्रभावी मंच है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार करने के लिए प्रेरित करें, ताकि वे विज्ञान के माध्यम से समाज के लिए उपयोगी समाधान प्रस्तुत कर सकें। कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों ने विज्ञान शिक्षा को अधिक व्यवहारिक, शोधपरक और नवाचार आधारित बनाने का संकल्प लेते हुए राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।
फॉर सस्टेनेबिलिटी निर्धारित की गई है। कार्यशाला में सतत विकास की अवधारणा को व्यवहारिक रूप से समझाने के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान आधारित परियोजनाओं की तैयारी पर विस्तार से चर्चा की गई
पांच प्रमुख विषयों पर हुआ प्रशिक्षण-कार्यशाला में प्रतिभागियों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की पांच उप-थीमों की विस्तार से जानकारी दी गई। इनमें आर-5 फॉर वेस्ट मैनेजमेंट रिड्यूस रीयूज, रिट्रीव, रीडिजाइन एवं रिसायकल ई-4 फॉन एनर्जी एक्सप्लोर, एक्सपेरिमेंट, एन्हांस एवं इवॉल्व जल संरक्षण एवं प्रबंधन फूड, एग्रीकल्चर एंड हेल्थ सस्टेनेबिलिटी के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा क अनुप्रयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला का उद्देश्य तब सार्थक माना जायेगा जब जिले से प्रोजेक्ट का चयन नेशनल तक होगा , सभी शिक्षकगण को अधिक से अधिक सहभागिता हेतु प्रेरित करते हुएअग्रिम शुभकामनाएं दि गई
