विनोद जैन
बालोद – बालोद शहर के हृदय स्थल मे एक मात्र खेल मैदान हैँ सरदार पटेल मैदान जिसकी दुर्दशा देखते ही बनती हैँ एक तरफ देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, हर घर तिरंगा फहराने की तैयारी चल रही है, और नगर पालिका प्रशासन स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह के लिए स्टेडियम को चमकाने में लगा है।
लेकिन दूसरी तरफ, शहर के हृदय स्थल में स्थित और देश के ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर बना सरदार पटेल मैदान अपनी बदहाली पर खून के आंसू बहा रहा है।
तस्वीरें नगर पालिका के दावों और कार्यप्रणाली की ऐसी ज़मीनी हकीकत बयां कर रही हैं, जिसे देखकर कोई भी शर्मसार हो जाए। यह मैदान अब खेल का मैदान नहीं, बल्कि शहर का एक नया ‘कचरा डंपिंग यार्ड’ नज़र आता है।
सबसे ज़्यादा अचरज की बात यह है कि यह मैदान नगर पालिका के बेहद करीब है। पालिका के अधिकारी और जनप्रतिनिधि रोज़ाना इसी रास्ते से गुज़रते होंगे, लेकिन उनकी नज़रें इस नरक बन चुके मैदान पर नहीं पड़तीं।
क्या नगर पालिका सिर्फ़ कागज़ी साफ़-सफ़ाई और 15 अगस्त के ‘दिखावे’ के लिए है? जब शहर के बीचों-बीच स्थित एक महत्वपूर्ण मैदान की यह हालत है, तो वार्डों की स्थिति का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।
