10 दिन में तीन छात्रों की मौत: आश्रम-शालाओं में मलेरिया से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

10 दिन में तीन छात्रों की मौत: आश्रम-शालाओं में मलेरिया से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

 

कांकेर। जिले में मानसून के साथ मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इसका शिकार आश्रम-शालाओं और छात्रावासों में रहने वाले बच्चे बन रहे हैं। पिछले लगभग 10 दिनों के भीतर हॉस्टल सरंडी, मर्दापोटी और डोमाहर्रा में एक-एक छात्र की मलेरिया से मौत हो चुकी है तो वहीं 11 छात्र मलेरिया पॉजिटिव मिले। लगातार हुई इन मौतों ने स्वास्थ्य विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

जानकारी के अनुसार, सबसे पहले सरंडी आश्रम में एक छात्र की मलेरिया से मौत हुई। इसके बाद मरदापोटी बालक आश्रम के छात्र सुभाष ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं डोमहारा की चौथी कक्षा में अध्ययनरत एक छात्रा की भी मलेरिया से मौत हो गई। तीनों घटनाओं के बाद जिले में चिंता का माहौल है।

 

मरदापोटी आश्रम में छात्र की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की, जिसमें आश्रम के छह बच्चे मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। सभी का उपचार शुरू किया गया है। वहीं गंभीर रूप से बीमार विक्रम मंडावी और तामेश्वर भास्कर को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। अन्य सात बच्चों का उपचार जारी है, जबकि नवीन कुमेटी का इलाज एमसीएच अस्पताल में चल रहा है।

 

स्वास्थ्य विभाग की जांच में आश्रम के आसपास के गांवों में भी मलेरिया संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिससे स्पष्ट है कि संक्रमण केवल आश्रम परिसर तक सीमित नहीं है।

लगातार हो रही इन मौतों के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। क्या छात्रों को बुखार आने पर तत्काल मलेरिया की जांच कराई गई? क्या आश्रम-छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो रहे थे? क्या पर्याप्त मच्छरदानियां उपलब्ध थीं और उनका उपयोग सुनिश्चित किया गया? क्या समय पर एम्बुलेंस और रेफरल की व्यवस्था मिली? तथा क्या मच्छर नियंत्रण के लिए नियमित फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव किया गया?

विशेषज्ञों का मानना है कि मलेरिया की समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश गंभीर मामलों में जान बचाई जा सकती है। ऐसे में लगातार हो रही मौतों के बाद पूरे जिले के सभी आश्रम-शालाओं और छात्रावासों में विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान चलाने तथा मलेरिया रोकथाम की व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

 

प्रमुख सवाल

 

– तीनों छात्रों को पहली बार बुखार कब आया?

– मलेरिया की जांच और उपचार में कितना समय लगा?

– क्या गंभीर स्थिति होने पर समय पर रेफर किया गया?

– क्या आश्रम-छात्रावासों में मलेरिया रोकथाम के सभी निर्देशों का पालन हो रहा था?

– क्या अब जिले के सभी आश्रम-शालाओं में विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जाएगा?

 

यह मामला केवल तीन छात्रों की मौत का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों बच्चों की सुरक्षा का है जो सरकारी आश्रम-शालाओं और छात्रावासों में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अब देखना होगा कि इन घटनाओं की जांच कर जिम्मेदारी तय होती है या नहीं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।