यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर
रायपुर (छत्तीसगढ़ परिदर्शन)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 21 अगस्त 2026 को जारी राजपत्र/अधिसूचना में विशेष शिक्षा से संबंधित विभिन्न पदों एवं उनकी शैक्षणिक योग्यताओं का प्रावधान किया गया है। लेकिन लर्निंग डिसएबिलिटी (LD)/स्पेसिफिक लर्निंग डिसएबिलिटी (SLD) के प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक के पद और संबंधित योग्यता का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से स्पेशल बीएड (LD) डिग्रीधारी अभ्यर्थियों में नाराजगी है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि डिग्री है, प्रशिक्षण है, आरसीआई से मान्यता प्राप्त योग्यता है, लेकिन अपने ही प्रदेश में नौकरी के लिए पद नहीं है। ऐसे में उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
कानून में मान्यता, प्रशिक्षण की व्यवस्था, फिर पद क्यों नहीं?
लर्निंग डिसएबिलिटी को राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट, 2016 में निर्दिष्ट दिव्यांगता के रूप में मान्यता प्राप्त है। वहीं रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (RCI) द्वारा इस क्षेत्र में विशेष शिक्षा के प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में भी प्रशिक्षित युवा स्पेशल बीएड (LD) की डिग्री हासिल कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में इनके लिए स्पष्ट पद नहीं होने पर सवाल उठ रहा है कि जिन बच्चों को विशेष शैक्षणिक सहायता की जरूरत है, उन्हें प्रशिक्षित विशेष शिक्षक आखिर उपलब्ध कैसे होंगे?
अन्य राज्यों में भर्ती, छत्तीसगढ़ में इंतजार
अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह स्थिति केवल छत्तीसगढ़ में ही क्यों दिखाई दे रही है? उनका कहना है कि देश के अन्य प्रदेशों में स्पेशल एजुकेटर एवं संबंधित पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जबकि छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित विशेष शिक्षक अपने ही राज्य में भर्ती का इंतजार कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है—
“क्या छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विशेष शिक्षकों को रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में जाकर आवेदन करना पड़ेगा? क्या अपने ही राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार का अधिकार नहीं मिलना चाहिए?”
उनका आरोप है कि ऐसी व्यवस्था से छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों के साथ घोर अन्याय और भेदभाव जैसी स्थिति पैदा हो रही है।
डिग्री लेने के बाद रोजगार का रास्ता बंद क्यों?
स्पेशल बीएड (LD) धारियों ने वर्षों की मेहनत और खर्च के बाद विशेष शिक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने यह योग्यता इसलिए हासिल की ताकि लर्निंग डिसएबिलिटी वाले बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा और सहयोग दे सकें।
लेकिन यदि सरकार भर्ती में इनकी योग्यता के अनुरूप पद ही निर्धारित नहीं करती, तो अभ्यर्थियों का सवाल है—
“जब पद ही नहीं होंगे तो प्रशिक्षण प्राप्त विशेष शिक्षक बच्चों तक कैसे पहुंचेंगे और उनकी विशेषज्ञता का उपयोग कहां होगा?”
एक फैसला—दो समस्याओं का समाधान
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार यदि सरकारी स्कूलों में लर्निंग डिसएबिलिटी वाले बच्चों के लिए प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों के पद सृजित कर भर्ती करती है, तो इससे दो महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान एक साथ हो सकता है।
एक ओर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को प्रशिक्षित शिक्षक मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर स्पेशल बीएड (LD) धारक बेरोजगार युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार का अवसर मिलेगा।
यह मामला केवल कुछ सौ अभ्यर्थियों की नौकरी का नहीं, बल्कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा, उनके अधिकार और उनके भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।
सरकार से तत्काल पुनर्विचार और पद सृजन की मांग
स्पेशल बीएड (LD) धारियों ने सरकार से मांग की है कि 21 अगस्त 2026 को जारी राजपत्र/संबंधित भर्ती प्रावधानों का पुनः परीक्षण किया जाए और लर्निंग डिसएबिलिटी के लिए विशेष शिक्षक के पद स्पष्ट रूप से शामिल किए जाएं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को इस विषय को महज भर्ती नियमों की तकनीकी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा—दोनों से जुड़ा गंभीर विषय है।
सबसे बड़ा सवाल—छत्तीसगढ़ के युवाओं को आखिर कब मिलेगा उनका हक?
जब लर्निंग डिसएबिलिटी को कानून में मान्यता प्राप्त है, आरसीआई इसके लिए प्रशिक्षित विशेष शिक्षक तैयार करता है और प्रदेश में ऐसे बच्चों की मौजूदगी है, तो फिर छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित LD शिक्षकों के लिए पद क्यों नहीं?
क्या सरकार की समावेशी शिक्षा की नीति सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी, या फिर छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों को भी उनके ही प्रदेश में रोजगार का अवसर मिलेगा?
अभ्यर्थियों की मांग स्पष्ट है—पद सृजित करें, भर्ती करें और प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों के भविष्य के साथ न्याय करें।
