बालोद नगर पालिका की कार्यप्रणाली फिर कटघरे में: 20 वार्डों में 400 कुर्सियों और 31 बेंच की खरीदी पर गंभीर सवाल RTI के 51 पन्नों में सामने आईं कई विसंगतियां; कागजों में ‘कुर्सी’, GeM इनवॉइस में ‘बेंच’ — अब डस्टबिन, पार्कों के झूले और LED स्ट्रीट लाइट की खरीदी भी जांच के घेरे में

विनोद जैन

बालोद। नगर पालिका परिषद बालोद में पार्षद निधि से की गई विभिन्न खरीदारियों को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त 51 पन्नों के प्रमाणित दस्तावेजों के प्रारंभिक परीक्षण के बाद भगवा भारतीय गण वार्ता पार्टी के जिला अध्यक्ष उमेश कुमार सेन ने नगर पालिका की खरीदी प्रक्रिया, भुगतान और वार्डवार वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्राप्त दस्तावेजों में वार्ड क्रमांक 01 से 20 तक 20-20 कुर्सियों का उल्लेख सामने आया है, यानी कुल 400 कुर्सियां। दस्तावेजों में दर्ज राशि के आधार पर प्रति कुर्सी लगभग ₹11,250 की दर सामने आती है। इस हिसाब से कुर्सियों की कुल राशि लगभग ₹45 लाख तक पहुंचती है। हालांकि वास्तविक सामग्री, दर, गुणवत्ता और मौके पर उपलब्धता का अंतिम निष्कर्ष भौतिक सत्यापन एवं संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

कागजों में कुर्सी, GeM इनवॉइस में बेंच—विसंगति ने बढ़ाए सवाल

आरटीआई से मिले दस्तावेजों में एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया है। नगर पालिका के भुगतान विपत्र में दिनांक 14 अक्टूबर 2025 के देयक क्रमांक 349 में उद्यानों के लिए GeM के माध्यम से कुर्सी क्रय किए जाने का उल्लेख है। वहीं संलग्न GeM इनवॉइस क्रमांक GEM-59412778 में सामग्री का विवरण “Replay Cast Iron Bench” दर्ज है।

इनवॉइस में 31 नग बेंच ₹14,500 प्रति नग की दर से कुल ₹4,49,500 दर्शाए गए हैं।

यह अंतर वास्तविकता में किस कारण से आया—दस्तावेजी त्रुटि, सामग्री के नाम में अंतर अथवा खरीद प्रक्रिया से जुड़ा कोई अन्य कारण—यह जांच का विषय है। अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर मौके पर उपलब्ध सामग्री का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

अभी तो शुरुआत है—डस्टबिन, पार्कों के झूले और LED स्ट्रीट लाइट की खरीदी भी जांच के दायरे में

उमेश कुमार सेन का कहना है कि आरटीआई से प्राप्त 51 पन्नों में सामने आए तथ्य पूरे मामले की सिर्फ शुरुआती कड़ी हैं। नगर पालिका की विभिन्न खरीदारियों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी और दस्तावेज भी उपलब्ध हो चुके हैं, जिनका अब क्रमबद्ध तरीके से परीक्षण किया जाएगा।

इनमें विशेष रूप से—

– डस्टबिन की खरीदी और वार्डवार वितरण
– पार्कों में लगाए गए झूले एवं अन्य सामग्री
– LED स्ट्रीट लाइट की खरीदी, संख्या और वितरण
– पार्षद निधि से खरीदी गई अन्य सामग्री
– खरीद दर, बिल, भुगतान वाउचर एवं GeM रिकॉर्ड
– वार्डवार स्वीकृति एवं वास्तविक स्थल पर उपलब्धता

जैसे बिंदुओं की जानकारी शामिल है।

इन सभी मामलों का एक साथ निष्कर्ष निकालने के बजाय एक-एक दस्तावेज और एक-एक खरीदी का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा, ताकि कागजी रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच वास्तविकता स्पष्ट हो सके।

दस्तावेजों के बाद अब जमीन पर होगी असली परीक्षा

अब सबसे महत्वपूर्ण चरण भौतिक सत्यापन का है। जिन स्थानों और उद्यानों के नाम पर सामग्री खरीदी गई है, वहां जाकर यह देखा जाएगा कि रिकॉर्ड में दर्ज सामग्री वास्तव में मौजूद है या नहीं।

साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि खरीदी गई सामग्री की संख्या, गुणवत्ता और विनिर्देश दस्तावेजों तथा GeM रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं।

यदि दस्तावेजों और मौके की स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों से जवाबदेही तय करने और नियमानुसार जांच की मांग की जा सकती है।

“एक-एक फाइल सामने आएगी, एक-एक खरीदी का हिसाब जनता के सामने रखा जाएगा”

भगवा भारतीय गण वार्ता पार्टी के जिला अध्यक्ष उमेश कुमार सेन ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने का नहीं, बल्कि जनता के पैसों के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का विषय है।

उन्होंने कहा कि आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। अभी कुर्सी और बेंच से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं, लेकिन डस्टबिन, पार्कों के झूले, LED स्ट्रीट लाइट सहित अन्य खरीदारियों की जानकारी भी उपलब्ध हो चुकी है। इनका खुलासा भी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

उनका कहना है कि जल्दबाजी में किसी को दोषी ठहराना उद्देश्य नहीं है। दस्तावेज क्या कहते हैं, मौके पर क्या मौजूद है और भुगतान किस आधार पर हुआ—इन तीनों पहलुओं का मिलान कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाएगी।

उमेश कुमार सेन ने कहा कि यदि जांच और भौतिक सत्यापन में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित सक्षम अधिकारियों के समक्ष निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जाएगी।

“अभी पर्दा पूरी तरह उठा नहीं है…”

उमेश कुमार सेन के अनुसार, “51 पन्नों की जानकारी को केवल शुरुआत माना जाना चाहिए। नगर पालिका की अन्य खरीदारियों से संबंधित दस्तावेज भी हमारे पास उपलब्ध हैं। डस्टबिन से लेकर पार्कों के झूले और LED स्ट्रीट लाइट तक, प्रत्येक खरीदी का दस्तावेजवार परीक्षण किया जाएगा। एक-एक करके सभी तथ्यों को जनता के सामने रखा जाएगा। हमारा उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि जनहित में यह सुनिश्चित करना है कि जनता के पैसे का उपयोग पारदर्शी और नियमानुसार हुआ है।”

अब देखना यह होगा कि आगामी भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों के मिलान में कागज और जमीन की तस्वीर कितनी एक जैसी निकलती है। आने वाले दिनों में अन्य खरीदारियों से जुड़े तथ्य सामने आने के साथ यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो सकता है