*करोड़ों की लागत से बना नेशनल हाईवे अंधेरे में डूबा* *क्या शासन-प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?*

विनोद जैन

बालोद। विकास की पहचान माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर यदि रात के समय अंधेरा पसरा रहे, तो करोड़ों रुपये की लागत से किए गए विकास कार्यों पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं। बालोद शहर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात्रि के समय स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से आम नागरिकों, वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौके पर ली गई तस्वीरें इस स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता उमेश सेन ने एक बार फिर नागरिक सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, हाईमास्ट एवं स्ट्रीट लाइट पोल भी लगाए गए, लेकिन यदि रात में पूरा मार्ग अंधेरे में डूबा रहे तो ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
रात का अंधेरा बन रहा दुर्घटनाओं का कारण
राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद गड्ढे, अवरोध, मवेशी, पैदल यात्री एवं अन्य जोखिम समय पर दिखाई नहीं देते। इससे किसी भी समय गंभीर सड़क दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते स्ट्रीट लाइट चालू नहीं की गई तो कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है।
पहले भी उठाए जा चुके हैं समाजिक कार्यकर्ता उमेश सेन द्वारा इससे पहले भी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे लगातार उठाए गए हैं। सड़क निर्माण की गुणवत्ता, अधूरे कार्य, जलभराव, नालियों की समस्या, सुरक्षा संकेतकों की कमी, अतिक्रमण तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े विषयों को समय-समय पर संबंधित विभागों के समक्ष रखा गया। कई मामलों में कार्रवाई हुई, लेकिन सड़क प्रकाश व्यवस्था का मुद्दा आज भी समाधान की प्रतीक्षा में है।
करोड़ों की परियोजना, लेकिन मूलभूत सुविधा अधूरी
जनता का प्रश्न है कि जब राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, तो स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधा नियमित रूप से क्यों संचालित नहीं हो रही? यदि लाइटें तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं तो उनका तत्काल सुधार क्यों नहीं किया जा रहा? यदि रखरखाव की जिम्मेदारी किसी एजेंसी को सौंपी गई है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
शासन-प्रशासन एवं संबंधित विभाग से अपेक्षा
जनहित एवं सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि—
पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का तत्काल निरीक्षण कराया जाए।
बंद पड़ी सभी लाइटों को प्राथमिकता के आधार पर चालू कराया जाए।
नियमित रखरखाव एवं मॉनिटरिंग की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
सड़क सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम तत्काल उठाए जाएँ।
जनहित में अपील
यह समाचार किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और जनहित से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय की ओर संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया जा रहा है। यदि इस समस्या का शीघ्र समाधान होता है तो हजारों नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा।