*16 वर्षीय बालिका इशा तातेड़ ने पूर्ण किए 30 उपवास, जैन श्री संघ ने किया अनुमोदन पूज्य अक्षयमुनिजी एवं दिनेशमुनिजी मसा के आशीर्वाद से तपस्या को मिला आध्यात्मिक संबल*

विनोद जैन

बालोद। धर्मनगरी बालोद में जैन धर्म की कठिन तपस्या (उपवास) का अनुकरणीय उदाहरण देखने को मिला। मात्र 16 वर्ष की बालिका इशा तातेड़ सुपुत्री स्व अर्पण नेहा तातेड़ ने आत्मसंयम, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए 30 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण की। उनकी इस तपस्या पर जैन श्री संघ बालोद के पदाधिकारियों द्वारा अनुमोदना करते हुए उनका अभिनंदन कर स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

इशा तातेड़ की इस तपस्या को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह और प्रसन्नता का माहौल है। इतनी कम उम्र में लगातार 30 उपवास जैसी कठिन तपस्या पूर्ण करना उनके दृढ़ मनोबल, आत्मसंयम और धर्म के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है।

तपस्या के दौरान पूज्य अक्षयमुनिजी मसा एवं पूज्य दिनेशमुनिजी मसा का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन इशा तातेड़ को प्राप्त होता रहा। संतों के आशीर्वाद से इशा ने अपनी तपस्या को पूर्णता तक पहुंचाया।

जैन श्री संघ के पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने इशा तातेड़ की तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर धर्म साधना की मंगलकामना की। समाजजनों ने कहा कि आज के समय में जब युवा पीढ़ी विभिन्न आकर्षणों की ओर बढ़ रही है, ऐसे में इशा द्वारा इतनी कम उम्र में संयम और तपस्या का मार्ग अपनाना निश्चित रूप से प्रेरणादायी है।

समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि तपस्या केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम, धैर्य, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना का माध्यम है। इशा तातेड़ ने अपनी साधना के माध्यम से समाज के युवाओं के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

जैन श्री संघ ने इशा तातेड़ एवं उनके परिवार को 30 उपवास की तपस्या पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई देते हुए तपस्या की अनुमोदना की।