*बस्तर में सियासी उबाल: अमित शाह के दौरे पर कांग्रेस का विशाल प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर पुलिस से तीखी झड़प, दीपक बैज ने दागे तीखे सवाल*

चंद्रहास वैष्णव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दो दिवसीय बस्तर दौरे के दौरान आज जगदलपुर में भारी सियासी ड्रामा और तनाव देखने को मिला। बस्तर के स्थानीय मुद्दों, निजीकरण और आदिवासियों के अधिकारों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक विशाल रैली निकालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में निकले इस ‘बस्तर अधिकार मार्च’ में पुलिस और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच जबरदस्त झड़प हुई, जिसके बाद दीपक बैज ने मीडिया के सामने आकर सरकार को तीखे आड़े हाथों लिया।

*मिताली चौक पर पुलिस ने रोका, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश*

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन से पैदल मार्च करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने और उन्हें मांग पत्र सौंपने के लिए कूच किया। इस रैली में पूर्व मंत्री मोहन मरकाम, बस्तर विधायक व उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल, पूर्व विधायक रेखचंद जैन तथा पूर्व महापौर जतिन जायसवाल सहित भारी संख्या में बस्तर संभाग के कार्यकर्ता शामिल थे।
जैसे ही रैली शहर के मिताली चौक पर पहुँची, पुलिस प्रशासन द्वारा की गई भारी बैरिकेडिंग ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पुलिस बल के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स को तोड़ने का प्रयास भी किया, लेकिन भारी पुलिस तैनात होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ सके। काफी देर तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके बाद कांग्रेसी वहीं धरने पर बैठ गए।

*”विपक्ष को रोक सकते हो, बस्तर की आवाज को नहीं” – दीपक बैज*

प्रशासन द्वारा रोके जाने से नाराज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में सरकार और पुलिस प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया। बैज ने कहा:
*”केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिन से बस्तर में हैं। हमारा उद्देश्य उनके दौरे का विरोध करना नहीं था। हम बस्तर के महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों को लेकर उनसे सकारात्मक चर्चा करना चाहते थे। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरी सरकार, प्रशासन और पुलिस ने मिलकर विपक्ष की आवाज को दबाने का काम किया है। वे कांग्रेसियों को रोक सकते हैं, लेकिन बस्तर की जनता की आवाज को नहीं।”*

*कांग्रेस ने उठाए बस्तर से जुड़े ये 13 प्रमुख मुद्दे*

दीपक बैज ने बताया कि कांग्रेस ने बस्तर के हक के लिए 13 सूत्रीय मांगें तैयार की थीं, जिन पर वे गृहमंत्री का रुख साफ चाहते थे:
नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण: नगरनार एनएमडीसी स्टील प्लांट को विनिवेशीकरण (Disinvestment) की सूची से बाहर करने की लिखित गारंटी।

• मुख्यालय का स्थानांतरण: एनएमडीसी के हैदराबाद स्थित मुख्यालय को तत्काल जगदलपुर स्थानांतरित किया जाए।
• बंद स्कूल: बस्तर में पिछले कुछ समय में बंद किए गए 2,000 से अधिक स्कूलों को दोबारा शुरू किया जाए।
• आदिवासियों पर दर्ज केस: जेलों में बंद 4,000 से अधिक आदिवासियों की रिहाई हो और 20 से 30 हजार आदिवासियों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं।
• जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा: नंदराज पहाड़ की लीज तत्काल रद्द की जाए और बैलाडीला खदानों के आवंटन की समीक्षा हो।
• रोजगार पैकेज: बस्तर के स्थानीय युवाओं के लिए विशेष रोजगार और नौकरी पैकेज का रोडमैप सार्वजनिक हो।
• अन्य मांगें: नक्सल प्रभावित पंचायतों को विशेष आर्थिक सहायता, बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों व पुल-पुलियों का निर्माण, कथित धान खरीदी घोटाले की जांच और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम।

*मुख्यमंत्री के ‘भ्रांति’ वाले बयान पर बैज का तीखा पलटवार*

हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस पर ‘जल-जंगल-जमीन बेचने की भ्रांति फैलाने’ के आरोपों पर दीपक बैज ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने सीधे सवाल दागते हुए कहा:
*”मुख्यमंत्री पहले यह स्पष्ट करें कि क्या नगरनार स्टील प्लांट विनिवेशीकरण की आधिकारिक सूची में शामिल है या नहीं? मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के हितों की रक्षा कर रहे हैं या किसी और के? वे बस्तर की जनता को बताएं कि डिपॉजिट 1A, 1B, 1C और कांकेर की हाहालद्दी खदान को उद्योगपतियों को बेचा गया है या नहीं?”*

*सड़क से सदन तक जारी रहेगा संघर्ष*

प्रदर्शन के समापन पर कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया कि केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात न कराने की प्रशासनिक रणनीति से उनके हौसले कम नहीं होंगे। दीपक बैज ने चेतावनी दी कि बस्तर के जल, जंगल, जमीन और यहां के आदिवासियों व युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस का यह संघर्ष अब सड़क से लेकर सदन तक और उग्र रूप लेगा।