*ऑनलाईन दवाई कारोबार के विरोध में 20 मई को देशभर के मेडिकल स्टोर्स रहेंगे बंद* *औषधि संघ ने अपील की है,कि गंभीर बीमारी वाले मरीज आवश्यक दवाइयों की खरीदी समय पूर्व कर ले*

यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

 

कांकेर। देश भर में तेजी से फैलते आनलाईन फार्मेसी कारोबार के खिलाफ अब, दवा व्यापारियों ने खुला मोर्चा खोल दिया है। आल इंडिया आर्गनाइजेशन आफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स संगठन के आव्हान पर आगामी 20 मई 2026 दिन बुधवार को देशव्यापी दवा व्यापार बंद का ऐलान किया गया है। इस आंदोलन को जिला कांकेर जिला औषधी विक्रेता संघ ने पूर्ण समर्थन देते हुए,जिले की सभी मेडिकल दुकानों को एक दिवसीय बंद रखने का निर्णय लिया है। दवा व्यापारियों का कहना है कि,यह लड़ाई केवल व्यापारिक प्रतिस्पर्धा की नहीं,बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था,मरीजो की सुरक्षा और दवाओं की विश्वसनीयता बचाने की लडाई है। संघ का आरोप है कि बिना मजबूत निगरानी और स्पष्ट नियमो के ऑनलाइन दवा बिक्री आने वाले समय में बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है।
आंदोलन की तैयारी को लेकर कांकेर जिले के औषधि विक्रेता संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सहयोग की मांग की है। कांकेर जिला के संघ के अध्यक्ष नारायणदास केवलरमानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम अरुण कुमार वर्मा को ज्ञापन सौपा इस दौरान सचिव पंकज टांक,मनोज बुधवानी अवनीश साहू,जीत चौहान,योगेंद्र सिंह,विक्रम नेताम,मनोज गंगबेर सहित कई केमिस्ट उपस्थित रहे।
*नशीली दवाओं के दुरुपयोग की आंशका*
संघ ने चेतावनी दी है कि आनलाईन प्लेटफार्म के जरिये आदत बनाने वाली और प्रतिबंधित नशे की दवाओं की होम डिलीवरी युवा पीढ़ी के लिए बडा खतरा बन रहा है। बिना प्रत्यक्ष पहचान और सत्यापन के दवाओं की उपलब्धता नशे और दवाओं के दुरुपयोग को बढ़ावा दे सकते है।
*मरीज की सुरक्षा पर बडा सवाल*
आफलाईन मेडिकल स्टोर्स में मरीज और डाक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की प्रत्यक्ष जांच की जाती है लेकिन आनलाईन माध्यम में यह प्रक्रिया कई बार केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। दवा व्यापारियों का आरोप है,कई मामलों में बिना पर्याप्त मेडिकल सत्यापन के दवाई बेची जा रही है। जिससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ सकती है। संघ पदाधिकारियों का है कि देशभर में लगभग 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट इस आंदोलन में शामिल हो रहे है। उनका कहना है कि यह किसी प्रतिस्पर्धा का मामला नही है,बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित रखने का प्रयास है,संघ ने आम जनता से अपील की है कि 20 मई के बंद को देखते हुए लोग अपनी जरूरी दवाओं की व्यवस्था पहले से कर ले, ताकि किसी प्रकार असुविधा ना हो। आपातकालीन स्थिति के लिए अस्पताल अधीक्षक को आपातकालीन नंबर उपलब्ध कराए जायेगे।
दवा व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान ड्रग्स एवं कास्मेटिक्स एक्ट उस दौर में बना था,जब आनलाईन दवा बिक्री जैसी कोई व्यवस्था नही थी। डिजिटल प्लेटफार्म के बढ़ते विस्तार के बीच मौजूदा कानून आनलाईन दवा कारोबार की चुनौतियों को नियत्रित करने में पूरी तरह सक्षम नही दिख रही है, संघ ने आनलाइन फार्मेसी से जुडे कई गंभीर खतरे गिनाये है। जैसे-एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का बढ़ता खतरा,
दवाओं की गुणवत्ता और तापमान पर भी सवाल,नकली प्रिस्क्रिप्शन का बढता खतरा,इन सभी संभावित खतरों को ध्यान मर रखकर ही औषधि को ऑनलाइन बिक्री की अनुमति देनी ही नही चाहिये। दवाई की गुणवत्ता,उपयोगिता,आवश्यकता केवल क्वालिफाई डॉक्टर ही समझ सकता है और उसके अनुसार दवाई का सेवन करना ही स्वास्थ्य के लिये सदैव सुरक्षित होता है और यह तब संभव होगा,जब डॉक्टर मरीज को देखकर,समझकर उसके बीमारी के हिसाब से दवाई लिखे,ऑफलाइन दवाई खरीदकर आप डॉक्टर की तत्काल दिखाकर सेवन कर सकते है लेकिन ऑनलाइन दवाइयों को मांगने और आने और उसके गुणवत्ता पर हमेशा एक प्रश्न चिन्ह लगा रहता है।