*चुनाव न होने से आक्रोश, वक्फ बोर्ड पर लगे गंभीर आरोप*

चंद्रहास वैष्णव

अंजुमन इस्लामिया कमेटी के चुनाव 17 महीनों से लंबित होने पर मुस्लिम समाज में नाराजगी है। गुरुवार को समाज के कुछ लोगों ने प्रेस वार्ता कर वक्फ बोर्ड और वर्तमान तदर्थ समिति पर चुनाव टालने व राजनीतिक हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए।

समाज के लोगों का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने चुनाव के लिए 3 महीने की समय-सीमा तय की थी, लेकिन 17 महीने बीतने के बाद भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। आरोप है कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने तदर्थ समिति में भाजपा से जुड़े लोगों को शामिल किया है। प्रतिनिधियों ने कहा, “समाज को धर्म के आधार पर राजनीति में बांटना गलत है। अंजुमन इस्लामिया सामाजिक संस्था है, राजनीतिक अखाड़ा नहीं।”

*गबन के आरोप और लंबित जांच पर सवाल*
पूर्व पदाधिकारियों पर करोड़ों के गबन के आरोप लगे थे। पुलिस जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है, लेकिन कलेक्ट्रेट स्तर पर जांच अभी लंबित है। समाज का आरोप है कि जानबूझकर जांच के बहाने चुनाव लटकाए जा रहे हैं, जिससे निर्वाचित कमेटी न होने के कारण अंजुमन की संपत्तियों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है।

*मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपेक्षा*
प्रेस वार्ता में कहा गया कि, “हम चाहते हैं कि समाज का पैसा समाज की तरक्की के लिए खर्च हो, न कि किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा को थोपने के लिए। हम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हैं ताकि निष्पक्ष चुनाव जल्द संपन्न हो सकें।”

*आंदोलन की चेतावनी*
मुस्लिम समाज ने स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान तदर्थ समिति को अपना प्रतिनिधि नहीं मानते। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं कराए गए, तो समाज अपने हक के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।

प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य रूप से समाज की ओर से जियाउल हक, असद रजा, शेख शाहिद अली, एस के हसन राजा, जावेद खान, समीर खान और सद्दाम रजा उपस्थित रहे।