यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर
कांकेर
सर्जना महिला साहित्य समिति कांकेर के तत्वावधान में दिनांक 10 मई 2026 को होटल आनंदम् के सभागार में पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया ।आयोजन के मुख्य अतिथि महायशी महादेवी वर्मा के भतीजे आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी ख्याति प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार जबलपुर एवं ‘हे हंसवाहिनी ज्ञानदायनी अंब विमल मति दे’ जैसी कालजयी सरस्वती वंदना के रचनाकार की पावन उपस्थिति, कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ गीता शर्मा, संस्थापक एवं अध्यक्ष सर्जना महिला साहित्य समिति कांकेर, विशिष्ट आतिथ्य डॉ. सीमा निगम रायपुर, श्री अरुण कौशिक, नगर पालिका अध्यक्ष कांकेर, शालिनी राजपूत अध्यक्ष हस्तशिल्प बोर्ड छत्तीसगढ़ शासन रायपुर, रानी शर्मा उपाध्यक्ष सर्जना महिला साहित्य समिति कांकेर विशिष्ट सम्मान से सम्मानित होने वाले विशिष्ट विभूतियां पल्लवी झा ,’रुमा’ एवं मोहन सेनापति, समाजसेवी एवं योगाचार्य एवं नगर के सफल व्यवसायी अशोक राठी तथा कांकेर कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत प्राध्यापक डॉ. एस. आर. बंजारे की पावन उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मां शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण के संग मां शारदे की वंदना रीना लारिया के मधुर कंठ से की गई। अत्यंत हर्ष का विषय एवं गौरव का पल रहा कि जिस सरस्वती वंदना का गायन सरस्वती शिशु मंदिर में करोड़ों विद्यार्थियों द्वारा प्रति दिवस एवं जन मानस द्वारा किया जाता है, उनके सृजनकर्ता ही कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथि देवों भवः की भावना को आत्मसात करते हुए समस्त अतिथियों का स्वागत, सम्मान, अतिथि परिचय के संग विधिवत कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। अवधेश लारिया द्वारा सलिल जी द्वारा रचित हिंदी भाषा की आरती प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में चार पुस्तकों का विमोचन, जिसमें प्रथम काव्य संग्रह *’सृजन से शिखर तक अंक-3’* छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों में अपनी साहित्यिक गतिविधियों में साधनारत 25 महिला रचनाकारों का साझा संग्रह, द्वितीय एकल संग्रह ‘*नमामि सिंहवाहिनी अपार कष्ट हारिणी*’ रचनाकार डॉ. गीता शर्मा, तीसरा संस्मरण *’यादों के झरोखे से’* लेखिका डॉ. मीरा आर्ची चौहान एवं चतुर्थ काव्य संग्रह ‘कुछ बातें कुछ यादें’ रचनाकार डॉ. राखी कोर्राम की कृतियों का विमोचन मंचस्थ अतिथियों एवं समस्त रचनाकारों की पावन उपस्थिति में करतल ध्वनि के संग संपन्न हुआ। पुस्तक समीक्षा कांकेर के वरिष्ठ साहित्यकार श्री शिव सिंह भदोरिया जी ने ‘नमामि सिंहवाहिनी अपार कष्ट हारिणी’ की समीक्षा एवं साझा संग्रह ‘सृजन से शिखर तक अंक 3’ की सारगर्भित समीक्षा डॉ. पूर्वा शर्मा एवं डॉ. सीमा परिहार द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम में दो विशिष्ट विभूतियों को ‘सर्जना शिखर सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया ,जिसमें नगद् 5100/- राशि, मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र, शॉल, पुस्तक संग्रह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। साहित्य के क्षेत्र में अपनी दीर्घकालीन साहित्य साधना एवं संविधान के कुछ अनुच्छेदों को छन्दबद्ध करने हेतु पल्लवी झा रूमा को सम्मानित किया गया एवं द्वितीय विशिष्ट विभूति कांकेर नगर के समाजसेवी , शिक्षकीय दायित्वों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले योगाचार्य, विभिन्न संगठनों से सम्बद्ध, सरस्वती कला मंच के संस्थापक एवं विभिन्न गतिविधियों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने वाले राज्य शिक्षक सम्मान प्राप्त मोहन सेनापति को उनके उल्लेखनीय अवदान हेतु ‘सर्जना शिखर सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया।
विभिन्न क्षेत्रों में विशेष कार्य करने के लिए विशेष पुरस्कार हेतु पांच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया, जिसमें सर्वप्रथम ऐसे साहित्य साधक का सम्मान, जिन्होंने आंचलिक साहित्यकारों को लघु शोध के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने का सराहनीय कार्य किया । शिक्षा के क्षेत्र में विशेष सम्मान के लिए प्रोफेसर नवरतन साव जी को सम्मानित किया गया। दूसरे क्रम में डॉ. सीमा परिहार जिनके द्वारा वर्तमान में आंचलिक कथाकारों पर शोध कार्य कराया जा रहा है, इस हेतु पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से स्कॉलरशिप भी प्राप्त हुई बस्तर क्षेत्र की महिला कथाकारों को सामने लाने के लिए इनका उत्कृष्ट प्रयास रहा। वर्तमान में पीजी कॉलेज में 120 छात्र-छात्राओं के लघु शोध प्रबंध कार्य में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है । तीसरे क्रम में विशेष पुरस्कार के लिए कर्तव्यनिष्ठ, साहस और कुशल नेतृत्व की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करने वाली उप पुलिस अधीक्षक विंकेश्वरी पिंदे जी को सम्मानित किया गया। चौथे क्रम में निस्वार्थ भाव से गौ सेवा कर मानवता और करुणा के अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करने वाली सुश्री पद्मिनी साहू जी को सम्मानित किया गया। पांचवे विशेष सम्मान पत्रकारिता के क्षेत्र में जनहित के प्रति समर्पण और सच्चाई को सामने लाने के लिए अदम्य साहस के लिए अपनी उत्कृष्ट अवदान हेतु प्रमिला नेताम जी को सम्मान पत्र प्रदान किया गया।
साझा संग्रह के समस्त रचनाकारों को ‘सृजन शिखर साहित्य सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. गीता शर्मा संस्थापक सर्जना समिति कांकेर, डॉ.प्रभा शुक्ला बलौदाबाजार, रानी शर्मा, कांकेर, गरिमा पोयाम, दुधावा, डॉ अन्नपूर्णा यादव बिलासपुर, रुक्मणी बंछोर, राजिम, रश्मि वर्मा,रायगढ़, टी विजय लक्ष्मी, दंतेवाड़ा, डॉ मीरा आर्ची चौहान, कांकेर, डॉ कुसुम जैन बड़गांव, पखांजूर, मंजू कोसरिया,कोरर, अनुरमा शुक्ला,दुर्ग, कामना पांडेय, बिलासपुर, सुचित्रा सामंत, जगदलपुर, डॉ राखी कोर्राम, नरहरपुर, नलिनी बाजपेयी, संबलपुर, डॉ सुधा देवांगन, रायगढ़, दुर्गा नेताम, करप, सरिता चंद्रेश राठी, किशनपुरी, कांकेर, मृदुला भास्कर, कांकेर, पूर्वा श्रीवास्तव, रायपुर, सुनीता रावटे, कांकेर, डॉ रश्मि विपिन अग्निहोत्री, केशकाल, सुषमा जे नेताम,उप वन मंडलाधिकारी, डॉ पूर्वा शर्मा सहायक प्राध्यापक, पद्माक्षी उपाध्याय को मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र, पुस्तक संग्रह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
विशेष योगदान हेतु सर्व श्री शिवसिंह भदौरिया, सुरेशचंद्र श्रीवास्तव, रीना लारिया, मंजू शर्मा,डॉ शशि चौहान, नीला दुबे, रायपुर, रिजेन्द्र गंजीर, रामशरण जैन, संतोष श्रीवास्तव ‘सम’ को मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र, पुस्तक संग्रह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। रचनात्मक कार्य हेतु डॉ वंदना गोपाल शर्मा ‘शैली’ एवं डॉ वर्षा शेखर शर्मा, राजेश शुक्ला एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में सीताराम शर्मा, अमित चौबे, मनोज जायसवाल एवं अभय शर्मा को सम्मानित किया गया।
मंचस्थ अतिथियों द्वारा अपने उद्बोधन में कार्यक्रम की महत्ता एवं सार्थकता की सराहना करते हुए कार्यक्रम को अधिवेशन का स्वरूप भी कहा गया। अपने मुख्य आतिथ्य उद्बोधन में सलिल जी ने कहा कि- कांकेर में “भारत माता मंदिर” बने। जहाॅं भारत के समस्त भाषाओं के संग हिन्दी भाषा ,हल्बी,गोड़ी आदि अन्य भाषाओं का उद्धरण हो जिस पर शोधार्थी अपनी भाषा पर शोध कर सकें और श्रेष्ठ शोधार्थी को कौशल्या रत्न ,कैकई रत्न सम्मान दिया जाए। कांकेर की पृष्ठभूमि एवं संचालित हो रहे कार्यक्रम को अपनी काव्यमय शैली में निरूपित करते हुए सलिल जी ने शुभकामनाएं सम्प्रेषित किये।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. गीता शर्मा ने कहा कि- कांकेर के दर्शनीय स्थलों के विकास के लिए “कांकेर विकास प्राधिकरण”का गठन हो।
बनारस, काशी, दिल्ली, उज्जैन आदि में ज्योतिष विज्ञान पढ़ाया जाता है। कांकेर में एक ज्योतिष विश्व विद्यालय की स्थापना की जाए,
क्योंकि मानव व्यवहार के लिए अत्यन्त शुभ, उपयोगी दिन सप्ताह, पक्ष, ऋतु, पर्व उत्सव आदि परिज्ञान ज्योतिष से होता है। इसमे इतिहास भूगोल गणित आदि सभी समाहित हैं। कांकेर में हमने ज्योतिष विद्या की नि:शुल्क शिक्षा 2006 से 2008 तक दी थी। विशिष्ट आतिथ्य उद्बोधन में डॉ सीमा निगम, श्री अरुण कौशिक, श्रीमती शालिनी राजपूत, डॉ बंजारे आदि ने अभूतपूर्व कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रसन्नता करते हुए, रचनात्मक कार्यों हेतु शुभकामनाएं प्रेषित की। प्रथम सत्र का संचालन डॉ पूर्वा शर्मा, डॉ सीमा परिहार एवं रिजेन्द्र गंजीर ने किया।
द्वितीय सत्र् भोजन पश्चात् प्रियंका नायक के सुंदर भजन से प्रांरभ किया गया, तत्पश्चात् समस्त साहित्यकारों द्वारा अपनी प्रतिनिधि रचना का पाठ किया गया। द्वितीय सत्र का संचालन डॉ मीरा आर्ची चौहान द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्जना महिला साहित्य समिति के समस्त सदस्यों की प्रमुख रूप से भूमिका रही, विगत दो महीने से कार्यक्रम की सफलता हेतु प्रयासरत् थी।
