ग्राम करपावंड में ‘सरपंच राज’, अतिक्रमण के नाम पर बेसहारा विधवा और गरीबों के आशियाने उजाड़े

चंद्रहास वैष्णव

ग्राम पंचायत करपावंड के सरपंच लखमुराम नेताम पर सत्ता और पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय निवासी कामता प्रसाद कोर्राम ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि सरपंच ने गांव में ‘अतिक्रमण’ हटाने के नाम पर तानाशाही रवैया अपनाते हुए कई गरीबों और एक बेसहारा विधवा महिला का मकान ढहा दिया है।

प्रमुख आरोप और घटनाक्रम:

• विधवा महिला का मकान तोड़ा: कामता प्रसाद ने बताया कि जनवरी में एक विधवा महिला, जिसके घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं है, उसका मकान जेसीबी से तोड़ दिया गया। महिला के पास उक्त भूमि का ‘वन अधिकार पट्टा’ भी मौजूद है, फिर भी उसकी एक न सुनी गई।

• दुकानें और गुमटियां ध्वस्त: सरपंच ने न केवल रिहायशी मकान, बल्कि गांव के करीब 6 दुकानों को भी तोड़ दिया। इनमें मछली और चिकन बेचने वाले गरीब ग्रामीणों की गुमटियां भी शामिल हैं, जो उनके जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन थीं।

• कोर्ट के ‘स्टे’ की अवहेलना: ग्रामीणों का आरोप है कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था और ‘स्टे ऑर्डर’ होने के बावजूद सरपंच ने रात के अंधेरे में कार्रवाई की। यहां तक कि तहसीलदार (CO) के मना करने पर भी सरपंच ने कार्रवाई नहीं रोकी।

• धमकी भरा लहजा: ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच खुलेआम धमकी देता है कि “अगर शिकायत करोगे तो तुम्हारे घर के अंदर का हिस्सा भी तोड़ दूंगा।”

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल:
ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत SP, कलेक्टर और राजस्व विभाग से भी की है, लेकिन अभी तक सरपंच के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई न होने से करीब 30-40 परिवार डरे हुए हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

“सरपंच ने गरीबों का जीना मुहाल कर दिया है। जिनके पास पट्टे हैं, उनके घर भी तोड़े जा रहे हैं। हमें समझ नहीं आ रहा कि कानून का राज है या सरपंच का।”
— कामता प्रसाद कोर्राम, स्थानीय निवासी

इस मामले में अब तक सरपंच लखमुराम नेताम का पक्ष सामने नहीं आया है। पीड़ितों ने मांग की है कि उच्च अधिकारी मौके पर आकर जांच करें और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए हुए नुकसान का मुआवजा दिलाएं।

Express MPCG