चंद्रहास वैष्णव 
बस्तर रेंज | 31 मार्च 2026
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च 2026 की डेडलाइन के अंतिम दिन बस्तर रेंज में सुरक्षाबलों ने बड़ी और समन्वित कार्रवाई करते हुए नक्सल नेटवर्क को करारा झटका दिया। चार जिलों—बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर—में चलाए गए अभियानों के दौरान कुल 33 नक्सली कैडरों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया।
बीजापुर में सबसे बड़ी कार्रवाई, करोड़ों की डंप रिकवरी
बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को सबसे बड़ी सफलता मिली। यहां 25 नक्सली कैडरों को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान 93 हथियार बरामद हुए, जिनमें 4 एके-47 और 9 एसएलआर राइफलें शामिल हैं।
इसके अलावा सुरक्षाबलों ने 14.06 करोड़ रुपये की बड़ी डंप रिकवरी की, जिसमें 2.90 करोड़ रुपये नकद और 7.2 किलोग्राम सोना शामिल है। बरामद सोने की कीमत लगभग 11.16 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई को नक्सलियों के आर्थिक तंत्र पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
दंतेवाड़ा में पांच कैडर गिरफ्तार
दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों ने पांच नक्सलियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 8 एसएलआर सहित अन्य हथियार बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई क्षेत्र में सक्रिय नक्सली मॉड्यूल को कमजोर करने में अहम साबित होगी।
सुकमा में हथियार और नकदी जब्त
सुकमा जिले में दो नक्सली कैडरों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से एक एलएमजी, दो एके-47 राइफलें और 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। सुकमा लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का प्रमुख क्षेत्र रहा है, ऐसे में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नारायणपुर में LMG के साथ गिरफ्तारी
नारायणपुर जिले में एक नक्सली को एलएमजी के साथ गिरफ्तार किया गया। यह ऑपरेशन छोटे स्तर का होने के बावजूद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
सरेंडर का भी दिखा असर
डेडलाइन के अंतिम दिन कई नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों का मानना है कि लगातार दबाव, प्रभावी रणनीति और पुनर्वास नीति के चलते नक्सलियों में सरेंडर की प्रवृत्ति बढ़ी है।
बस्तर रेंज में एक ही दिन में हुई इस व्यापक कार्रवाई ने नक्सल संगठन की सैन्य और आर्थिक क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सुरक्षाबलों की इस सफलता को क्षेत्र में शांति और स्थायित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
