चंद्रहास वैष्णव 
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को जगदलपुर पहुंचे, जहां उन्होंने लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम 2026 के भव्य समापन समारोह में शिरकत की। कार्यक्रम से पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री ने उत्सव परिसर में लगाए गए विभिन्न सांस्कृतिक एवं हस्तशिल्प स्टालों का निरीक्षण किया और बस्तर की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और खानपान की सराहना की।
समारोह की शुरुआत में राज्य के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बस्तर पंडुम की अवधारणा, उद्देश्य और इसके सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके पश्चात बस्तर के आदिवासी समाज द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित मंचासीन अतिथियों का बस्तरिया फागा पहनाकर पारंपरिक स्वागत किया गया। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग द्वारा बस्तर पंडुम पर आधारित विशेष वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया।
स्थानीय विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने अपने संबोधन में केंद्रीय गृहमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि यह बस्तर के लिए गौरव का विषय है कि बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर देश के गृह मंत्री स्वयं उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की लोककला, संस्कृति, खानपान और नाट परंपराओं को केंद्रीय गृहमंत्री के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अमित शाह के संकल्प के कारण बस्तर आज लाल आतंक से मुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहली बार 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने की घोषणा की थी, तब इस पर केवल दो लोगों को विश्वास था—एक स्वयं अमित शाह और दूसरे बस्तर की जनता। आज वह संकल्प पूरा होने की कगार पर है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जवानों के साहस और संकल्प से बस्तर की तस्वीर तेजी से बदल रही है। उन्होंने बताया कि 45 वर्षों से अधिक समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा बस्तर, केरल से भी बड़े क्षेत्रफल वाला इलाका है, जहां लंबे समय तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं। लेकिन गृह मंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति और ठोस रणनीति के चलते मात्र दो वर्षों में यहां शांति और विकास का माहौल बना है। उन्होंने इस अवसर को बस्तर के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।
अपने संबोधन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि माओवादियों ने गरीब आदिवासी युवाओं के हाथों में हथियार थमाकर तिरुपति से पशुपतिनाथ तक ‘रेड कॉरिडोर’ का नारा दिया और साढ़े चार दशकों तक इस पूरे क्षेत्र के विकास को रोके रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि बस्तर माओवादी हिंसा से प्रभावित नहीं होता, तो आज यह देश का सबसे विकसित जिला होता।
अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि आने वाले 10 वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में माओवाद से 90 प्रतिशत क्षेत्र मुक्त हो चुका है और 31 मार्च 2026 से पहले माओवादी समस्या को जड़ से समाप्त कर दिया जाएगा।
हालांकि, उन्होंने माओवादियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सरकार एक भी गोली चलाना नहीं चाहती और जो माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे, उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया जाएगा। लेकिन स्कूल और अस्पताल जलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति से है। उन्होंने आश्वस्त किया कि बस्तर को छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री को कौड़ी की माला और पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।

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