कॉरपोरेट में 15 लाख का पैकेज छोड़ की यूपीएससी की तैयारी, दो बार की नाकाम होकर भी नहीं मानी हार, तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंकिंग में मिला 681वां स्थान बस्तर की बेटी जिज्ञासा सहारे ने यूपीएससी में हासिल की कामयाबी, 2019 से यूपीएससी की तैयारी में जुटीं, आईएएस को बनाया लक्ष्य, इसके लिए नहीं चुनी गईं तो फिर करेंगी तैयारी

आर एस भटनागर

जगदलपुर। संघ लोक सेवा आयोग के नतीजे मंगलवार को जारी हो गए हैं। इसमें बस्तर की बेटी 26 साल की जिज्ञासा सहारे ने ऑल इंडिया रैंकिंग में 681वां स्थान हासिल करते हुए कामयाबी पाई है। दरअसल करीब एक साल तक कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने का मन बनाया और इसके लिए उन्होंने अपना 15 लाख के पैकेज को छोड़ दिया। यूपीएससी में अपने तीसरे प्रयास में वे चयनित हुई हैं। यूपीएससी को चुनने के पीछे का कारण उन्होंने बताया कि इससे वे आम लोगों से सीधे जुड़कर उनकी सेवा कर सकेंगी, जबकि कॉरपोरेट में वे हालांकि लाखों का पैकेज कमा सकती हैं, लेकिन देश की सेवा नहीं कर पाएंगी। इसलिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी को चुना। पहले और दूसरे प्रयास में नाकाम होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरी बार परीक्षा की तैयारी में जुट गईं। जिज्ञासा बताती हैं कि यदि इस बार उन्हें आईएएस कैडर नहीं मिल पाता है तो वे फिर यूपीएससी की तैयारी करेंगी, क्योंकि उन्होंने अपना लक्ष्य आईएएस अफसर बनना तय कर लिया है।

जगदलपुर के निर्मल विद्यालय से 10वीं तक की पढ़ाई के बाद वे विशाखापट्‌टनम चली गईं, जहां उन्होंने साल 2014 में 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद नागपुर एनआईटी से साल 2018 में ट्रिपल ई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे आदित्य बिड़ला ग्रुप में बतौर असिस्टेंट मैनेजर काम करने लगीं, जहां उन्हें शुरूआत में ही 15 लाख का पैकेज मिला। करीब एक साल तक उन्होंने कंपनी में नौकरी की और साल 2019 से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

जिज्ञासा ने एक्सप्रेस एमपीसीजी से चर्चा करते बताया कि यूपीएससी की तैयारी के लिए वे दिल्ली चली गईं और वहीं से कोचिंग की, लेकिन पहले प्रयास में वे प्री-लिम्स की क्लीयर कर पाईं, लेकिन मेन्स में उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई। फिर वे वापस लौट आईं और इसके बाद दूसरे प्रयास में भी उन्होंने प्री-लिम्स निकाल लिया, जबकि मेन्स में दूसरी बार नाकाम हुईं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरी बार पूरी ताकत लगाकर उन्होंने तैयारी शुरू की और उन्हें इस बार कामयाबी मिली।

बैंक अफसर धनेश्वर सहारे व डाक विभाग में कार्यरत माहेश्वरी सहारे की बेटी जिज्ञासा शुरू से ही मेधावी रहीं हैं। पिता धनेश्वर व मां माहेश्वरी ने बताया कि उन्होंने कभी बेटी पर करियर चुनने का दबाव नहीं बनाया। जिज्ञासा ने जिस भी क्षेत्र में अपना करियर चुनने का इच्छा जताई, उसमें पूरा सहयोग दिया। यही कारण है कि आज उनकी बेटी यूपीएससी क्लीयर कर चुकी हैं। इधर उनकी दादी इंदिया सहारे का कहना है कि जिज्ञासा ने आज अपने दादा का सपना पूरा कर दिया है।

अपनी तैयारियों को लेकर जिज्ञासा ने बताया कि पहले साल कोचिंग के बाद उन्होंने दूसरे प्रयास से सेल्फ स्टडी शुरू कर दी। इसके लिए उन्होंने पूरा शेड्यूल बनाया, जिसमें दिन के करीब 8 से 10 घंटों तक पढ़ाई की। मेन्स के लिए उन्होंने यूपीएससी की तर्ज पर कोचिंग सेंटर में होने वाली परीक्षाओं में हिस्सा लिया। इसमें उन्हें 1 मिनट में न्यूनतम 60 शब्द लिखने का अभ्यास किया।