बस्तर पहुंचे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, भाजपा पर लगाए आरोप, कहा- राष्ट्रपति आदिवासी, इसलिए राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में मोदी-भाजपा ने उन्हें नहीं बुलाया बस्तर नगर पंचायत के लाल बहादुर स्टेडियम में राहुल गांधी ने आदिवासियों को किया संबोधित

आर एस भटनागर

जगदलपुर। बस्तर नगर पंचायत के लाल बाहदुर शास्त्री स्टेडियम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनावी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा और मोदी सरकार ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से दूर रखा, क्योंकि वे आदिवासी हैं। उन्होंने कहा कि देश में अभी दो विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है, जिसमें कांग्रेस और इंडी गठबंधन के सहयोगी संविधान को बचाने लड़ रहे हैं, वहीं मोदी, शाह, भाजपा, आरएसएस और इनसे जुड़े लोग संविधान बदलने जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम आदिवासी कहते हैं, क्योंकि हम मानते हैं कि जब भारत में कोई नहीं था, तब यहां आदिवासी था। जल, जंगल, खनिज ये धरती आदिवासियों की है और इसके असली मालिक भी आदिवासी ही हैं। भाजपा आदिवासियों को वनवासी कहती है। आदिवासियों को वनवासी कहना भी एक साजिश है। राहुल बोले कि मोदी की सरकार आई तो एक दिन ऐसा भी आयेगा जब जंगल ही नहीं बचेगा।

राहुल गांधी ने अपनी सभा में आदिवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा आपको धर्म, जाति, बोली के आधार पर लड़वा रही है हमने आपके लिए पेशा कानून लाया, ट्रायबल बिल लेकर आये आदिवासियों की जमीनंे वापस दी लेकिन बीजेपी के लोग अडानी जैसे करोड़पतियों को आपका जल, जंगल, जमीन दे रहे हैं एक दिन ऐसा आयेगा कि जंगल नहीं बचेगा भाजपा के लोग चाहते हैं कि आदिवासियों के बच्चे आगे न बढ़ें, उन्हें अच्छी शिक्षा न मिले वो बड़े पदों पर न बैठें यही कारण है कि वो संविधान को बदलने जा रहे हैं हम चाहते हैं कि ये देश आपका है आपके बच्चे शिक्षित हो आगे बढ़ें।

उन्होंने कांग्रेस की गारंटियों का जिक्र करते हुए कहा कांग्रेस की सरकार बनते ही सबसे पहले 30 लाख सरकारी पदों पर तत्काल स्थायी नियुक्ति की जायेगी और देश में नौकरी को लेकर चल रही ठेकेदारी प्रथा खत्म की जायेगी। इसके लिए उन्होंने एक फार्मूला भी बताया। देश की 90 फीसदी आबादी गरीब, आदिवासियों, अल्पसंख्यको, दलितों, ओबीसी की है। इनकी भागीदारी कहीं नहीं है। मीडिया घरानों में इस वर्ग का कोई भी व्यक्ति नहीं है। हिंदुस्तान की सरकार को 90 अफसर चलाते हैं। ये अफसर ही देश के बजट का निर्धारण करते हैं याने कि किसके हिस्से में कितना पैसा जायेगा ये ही तय करते हैं इन 90 अफसरों में सिर्फ एक आदिवासी अफसर है। ऐसे में 90 फीसदी लोगों की भागीदारी ही नहीं हो पा रही है। पूरा बजट दो-तीन प्रतिशत लोगों के पास जा रहा है। पीएम मोदी ने अपने उद्योगपति मित्रों का 16 लाख करोड़ का कर्जा माफ कर दिया ये इतना पैसा होता है कि 24 साल तक इससे मनरेगा की योजना चलती इसलिए हम कह रहे हैं कि जातिगत गणना होनी चाहिये, दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। इसके अलावा लखेश्वर बघेल, कवासी लखमा, दीपक बैज, सचिन पायलट ने भी अपनी बात रखी।