केशकाल विधानसभा भाजपा के प्रत्याशी नीलकंठ टेकाम कोंडागांव जिला प्रशासन के पूर्व उच्च अधिकारी पर बुनकर समिति की महिलाओं ने लगाया करोड़ों रुपए कर्जे में फसाने का आरोप

फागु यादव


मां दंतेश्वरी बुनकर सहकारी समिति मर्यादित बफना की महिलाएं स्वालंबी बनने के बजाय कर्जदार बन गई है और अब इंसाफ की गुहार लगाती फिर रहीं है। इसी तारतम्य में बुधवार को कोंडागांव स्थित प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में महिलाओं ने लाखों रुपए उनकी समिति के नाम से तत्कालीन कलेक्टर नीलकंठ टेकाम के साथ कांकेर की एक महिला सरस उपाध्याय पर लाखों की हेरा फेरी का आरोप लगाया है। आपको बता दें कि नीलकंठ टेकाम वर्तमान में केशकाल विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी में है और भाजपा की घोषित विधायक प्रत्याशी बताया जा रहे हैं। बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बुनकर समिति की अध्यक्ष गंगा नेताम ने कहा कि आनन फानन में समिति का गठन कर पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम एवम सरस उपाध्याय ने हमे धोखा दिया है। गंगा नेताम ने बताया कि नक्सल पीड़ित परिवार एवम अन्य महिलाओं को रोजगार देने के नाम पर पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम के द्वारा मां दंतेश्वरी बुनकर सहकारी समिति मर्यादित का गठन किया गया। महिलाओं ने बताया की नीलकंठ टेकाम ने सरस उपाध्याय नाम की कांकेर की एक महिला को इस समिति को चलाने व लेखा-जोखा सहित अन्य कार्य हेतु नियुक्त किया था। पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम के आदेश से समिति में जितनी भी राशि आती थी वह मैडम सरस उपाध्याय ही लेनदेन करती थी। 40 लाख से अधिक की राशि गणवेश बनाने के लिए एवम अन्य कार्य के लिए 10 लाख से अधिक की राशि जारी हुआ था। लेकिन उक्त प्राप्त धन राशि को सरस उपाध्याय ने अपने खाते में आहरित करवा लिया। वहीं उक्त राशि की भरपाई अब जिला प्रशासन वसूली के लिए हमें नोटिस जारी कर वसूली की बात कह रही है। जबकि उक्त 40 लाख से अधिक राशि का गबन करने वाले पूर्व कलेक्टर व सरस उपाध्याय के खिलाफ एक साल से कलेक्टर कोंडागांव, पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव सहित थाने में शिकायत कर जांच करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई भी अधिकारी कार्यवाही व जांच नहीं कर रहे हैं। जिसमें हम लोग परेशान हो रहे हैं। समिति की सचिव सुलेखा नेताम ने कहा कि हमें समिति का अध्यक्ष व सचिव बना दिया गया। लेकिन हमने कभी सहकारी समिति गठन के लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया था। समिति का गठन होने के बाद हमें आगे के काम के लिए समिति के नाम पर पैसे भी जारी किए गए। तब हमने सोचा कि हम लोगों ने हथकरघा का प्रशिक्षण लिया है तो हमें जिले के उच्च अधिकारी प्रमोट करना चाह रहे हैं। इसलिए हम लोगों ने उनकी हर बात मानी और अब हमें ही मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान किया जा रहा है। जो काम हमने कभी किया ही नहीं उसके लिए हमें नोटिस पर नोटिस जारी किया जा रहा है। महिलाओं ने बताया की पूरा मामला 2018 से 2020 का है। जब समिति को काम के नाम पर लाखों रुपए समय-समय पर मिल तो रहे थे। लेकिन हम लोगों ने उच्च अधिकारी के कहने पर समिति के खाते में आए उक्त राशि को एक अन्य एनजीओ को समय समय पर चेक के माध्यम से भुगतान होते रहे है। क्योंकि यहां पदस्थ रहे एक प्रशासनिक उच्च अधिकारी के कहने पर ही हमने उस एनजीओ की संचालक को अपने चेक बुक भी दे दिए थे और वही पूरा समिति की दस्तावेजी कार्य भी किया करती थी। इसलिए उन्होंने चेक बुक के कोरे पन्ने पर पहले ही हमसे यह कह कर हस्ताक्षर भी ले लिए थे कि कभी भी जरूरत पड़ेगी तो तुम लोगों को कहां ढूढ़ूंगी। उन्होंने बताया कि हमारे पास कुछ दस्तावेजी साक्ष्य भी है जिसे सूचना के अधिकार के तहत निकाला है। इस मामले को लेकर हमने डेढ़ साल पहले ही एसपी को मामले की जांच के लिए आवेदन भी दिया है। वहीं कलेक्टर से भी मिलकर इस मामले की पूरी जांच करने की बात कही है। लेकिन अब तक इस मामले पर कोई उचित कार्यवाही नहीं हो पाई है। गंगा व सुलेखा ने बताया कि हम चाहते हैं कि इस मामले की पूरी जांच हो जिससे कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए क्योंकि जो काम हमने नहीं किया है उसके लिए हमें बार-बार नोटिस दिया जा रहा है और हमें इससे मानसिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। आपको बता दे महिलाओं ने प्रेसवार्ता के दौरान यह भी कहा की मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होने पर ये महिलाएं पैदल यात्रा करते हुए मुख्यमंत्री से मिलने राजधानी जाएंगी। पीड़ित आदिवासी महिलाओं ने बताया की जब स्थानीय स्तर पर उनके दिए आवेदनों पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है तो वह अब मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले की शिकायत करते हुए जांच की मांग करेंगे। इसके लिए वें 25 सितंबर को जिला मुख्यालय से राजधानी के लिए पैदल मार्च करेंगी।

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