विनोद जैन 
बालोद, 04 अगस्त। छत्तीसगढ़ शासन का नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एक तरफ अवैध प्लाटिंग और अवैध कॉलोनियों पर नकेल कसने के लिए कड़े फरमान जारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका परिषद बालोद शासन के ही नियमों को ठेंगा दिखाने में जुटी हुई है। हाल ही में राज्य शासन द्वारा जारी पत्र में प्रदेश के समस्त आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अवैध प्लाटिंग एवं कॉलोनी निर्माण के प्रकरण संज्ञान में आते ही तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए। लेकिन बालोद नगर पालिका में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। यहां अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाने या एफआईआर दर्ज कराने के बजाय, सरकारी खजाने से लाखों रुपये बहाकर वहां चमचमाती सड़कें बनाई जा रही हैं।
शासन का स्पष्ट आदेश: कार्रवाई करो, बुलडोजर चलाओ:
शासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश पत्र में साफ़ निर्देश दिए गए हैं कि, छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 339 (ग) के तहत अवैध कॉलोनी का निर्माण व काटने वाले व्यक्तियों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज हो। अवैध प्लाटिंग स्थल पर किए गए निर्माण जैसे रोड, प्लिंथ या अन्य संरचनाओं को नियमानुसार पूर्णतः ध्वस्त किया जाए तथा निर्माण सामग्री जब्त की जाए। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अवैध कॉलोनी में भवन नक्शा, बिजली या जल संयोजन की अनुमति देता है, तो उस पर धारा 339 (घ) के तहत कड़ी कार्रवाई हो।
जमीन दलालों के हौसले बुलंद:
नियमों के मुताबिक, किसी भी गैर-मान्यता प्राप्त या अवैध कॉलोनी में बिना नियमितीकरण के सरकारी पैसे से पक्की सड़क या नाली का निर्माण नहीं कराया जा सकता। लेकिन बालोद नगर पालिका की इस मेहरबानी से सीधा फायदा भू-माफियाओं और जमीन दलालों को पहुंच रहा है। सरकारी खर्च पर पक्की सड़कें बनते ही अवैध कॉलोनियों में जमीनों के दाम रातों-रात आसमान छूने लगेंगे, जिसका सीधा मुनाफा दलाल बटोरेंगे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किसके इशारे और फायदे के लिए पालिका प्रशासन सरकारी खजाने की बलि चढ़ा रहा है? क्या 15वें वित्त आयोग की जनहितैषी राशि का इस्तेमाल अवैध प्लाटिंग को वैधानिकता का मुखौटा पहनाने और दलालों की जेबें भरने के लिए किया जा रहा है? उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर तत्काल निष्पक्ष जांच करनी चाहिए!
बालोद पालिका की उल्टी गंगा: बुलडोजर चलाने के बजाय बिछा रहे सड़कें;
शासन का आदेश कहता है कि अवैध कॉलोनी की सड़कों को ध्वस्त किया जाए, लेकिन बालोद पालिका 15वें वित्त आयोग (अनटाईड ग्रांट) के मद से तकरीबन 37.40 लाख के विकास कार्यों की स्वीकृति की आड़ में अवैध कॉलोनियों को चमकाने में लगी है। शासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए रेलवे कॉलोनी अली जनरल स्टोर्स से शत्रुहन सिन्हा घर तक सीसी रोड निर्माण लागत राशि 14.88 लाख एवं स्टेडियम के पीछे (नया कॉलोनी) तक सीसी रोड निर्माण लागत राशि 10.00 लाख के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। सरकारी पैसों से पक्की सड़कें बनने के बाद जमीन दलाल आसानी से प्लॉट बेचकर निकल जाएंगे और जनता व शासन ठगा सा रह जाएगा।
भू-माफियाओं को पालिका का अभयदान, जिम्मेदार मौन:
जब शासन का स्पष्ट आदेश है कि अवैध प्लाटिंग की सूचना तत्काल राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को दी जाए और कोलोनाइजर पर कानूनी शिकंजा कसा जाए, तब बालोद पालिका का दलालों पर यह विशेष प्रेम कई संगीन सवाल खड़े करता है। क्या शासन के उच्चाधिकारियों के आदेश बालोद पालिका के लिए कोई मायने नहीं रखते। जिन्हें अवैध सड़कों को उखाड़ना चाहिए था, वे ही 25 लाख से अधिक रुपये खर्च कर नई सड़कें क्यों बनवा रहे हैं? क्या इस पूरे खेल में भू-माफियाओं और पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की अंदरूनी सांठगांठ है?
बड़ा सवाल:
एक तरफ शासन एफआईआर दर्ज करने और निर्माण ध्वस्त करने का आदेश देता है, वहीं दूसरी तरफ बालोद पालिका उन्हीं अवैध जगहों पर टेंडर निकालकर दलालों की चांदी करा रही है। क्या उच्चाधिकारी बालोद पालिका की इस मनमानी और शासन के आदेशों की अवहेलना पर कोई संज्ञान लेंगे?
