भरत भारद्वाज
कोंडागांव – प्रशासन किस कदर लापरवाह हो सकता है , इसके लिए बड़े राजपुर ब्लॉक से बड़ा उदाहरण नहीं होगा। यहां साल भर से सड़कों पर गड्ढों से जहां लोग परेशान हैं वहीं मुख्य मार्ग पर पुलिया टूटने के बाद भी प्रशासन साल भर तक बेखबर रहता है। मामला बडेराजपुर ब्लॉक के पारोंड पंचायत का है जहां मुख्य मार्ग पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो चुका था क्षतिग्रस्त पुल से ही छोटी-बड़ी सभी वाहने फर्राटे से दौड़ रही थी। ग्रामीण बार-बार शिकायत कर रहे थे किंतु प्रशासन टस से मस नहीं हुआ। मीडिया में प्रमुखता से खबरें छपी तब जाकर प्रशासन जागा। तत्पश्चात कुछ प्रशासनिक अधिकारी एवं आर ईएस विभाग के लोग पुलिया का निरीक्षण करने पहुंचे जहां पता चला कि प्रधानमंत्री सड़क योजना के बीच में यह पुल है। तब प्रधानमंत्री सड़क विभाग को मामले की सूचना दी गई किंतु उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि यह सड़क उनका है किंतु पुलिया उनका नहीं है, यह पुल सड़क बनाने से पहले ही बना था जिससे उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। तत्पश्चात आर ई एस विभाग को तलब किया गया उसने भी पुल की जिम्मेदारी नहीं ली जिससे उक्त पुल का कोई माई बाप नहीं होने से टूटे हुए पुलिया को कुछ और तोड़कर पैदल एवं साइकिल सवारों के लिए आने जाने लायक बना दिया गया। भारी वाहन एवं अन्य चार पहिया वाहनों के लिए पंचायत की ओर से कुछ मुरम डालकर खेत की ओर से कच्चा डायवर्सन बना दिया गया है। उस समय ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए आश्वासन दिया गया कि मनरेगा के द्वारा नया पुल बनाया जाएगा तथा आवागमन की सुविधा जल्द ही सुलभ हो सकेगी किंतु 6 माह बाद भी यहां किसी प्रकार का कार्य शुरू नहीं हो सका जिससे वह पुल जस का तस टूटे पड़े हालत में है। इस टूटे हुए पुल से मोटरसाइकिलों की आवाजाही हो रही है। जो कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर कच्चा डायवर्शन भी बेमौसम की बारिश से खराब होता दिख रहा है। जिससे यहां आवागमन बाधित हो सकता है तथा आसपास के कई गांव के लोगों को इससे परेशानी होने की संभावना है। मानसून आने में माह भर का समय बाकी है किंतु प्रशासनिक एवं विभागीय लापरवाही के चलते पुल का निर्माण शुरू नहीं किया जा सका जिसका खामियाजा क्षेत्र के ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है।
*बच्चे नहीं पहुंच पाएंगे स्कूल*
यदि समय रहते नया पुल का निर्माण नहीं हो पाया तो बच्चों का स्कूल भी प्रभावित हो सकता है क्योंकि जिस डायवर्सन से कच्चा सड़क बनाया गया है वह खेतों से होकर जाता है जहां किसान बरसात में धान की फसल लगाएंगे। ऐसी स्थिति में इस मार्ग को बंद करना पड़ सकता है। जिससे ग्राम पारोंड एवं लिहागांव से आने जाने वाले लोगों को परेशानी तो होगा ही दूसरी ओर पारोंड विश्रामपुरी में पढ़ने वाले बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाएंगे। इसके अलावा डीएवी के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी मुश्किल होगा तथा उन्हें 25 किलोमीटर की दूरी तय करके स्कूल जाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में डीएवी में पढ़ने वाले बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे।
