चंद्रहास वैष्णव 
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प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
फार्मासिस्ट के घर इलाज के दौरान हुई थी बच्चे की मौत, CMHO ने दिए थे जल्द जांच और कार्रवाई के निर्देश, लेकिन अब तक ठोस नतीजा सामने नहीं आया
भैरमगढ़ क्षेत्र में 10 वर्षीय मासूम आर्यन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 10 अक्टूबर को दैनिक भास्कर में प्रमुखता से प्रकाशित खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले की जल्द जांच कराने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन घटना के 25 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मासूम की मौत की जांच कहां तक पहुंची और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
मामला भैरमगढ़ में पदस्थ शासकीय फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सिंह चंदेल के निजी आवास पर बच्चे के इलाज से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, तबीयत बिगड़ने पर 10 वर्षीय आर्यन को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद फार्मासिस्ट उसे अपने घर ले गए। वहां उपचार के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने पर अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना के बाद परिजनों ने उपचार के तरीके, दी गई दवाइयों और चिकित्सकीय लापरवाही की आशंका जताई थी। यह भी सवाल उठाया गया था कि आखिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी के निजी आवास पर बच्चे का इलाज किन परिस्थितियों में किया गया? उसे कौन-सी दवाइयां दी गईं और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं?
##जांच का भरोसा मिला, लेकिन कार्रवाई का अता-पता नहीं!##
10 अक्टूबर को प्रकाशित खबर में CMHO डॉ. बीआर पुजारी ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए जल्द जांच कराने और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही थी। लेकिन अब तक जांच की स्थिति, जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारी तय किए जाने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं होना स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।
आखिर जांच पूरी हुई या नहीं? यदि हुई तो उसकी रिपोर्ट कहां है? यदि जांच लंबित है तो इसके पीछे क्या कारण हैं? क्या संबंधित फार्मासिस्ट से पूछताछ हुई? क्या उपचार में इस्तेमाल की गई दवाइयों और चिकित्सकीय प्रक्रिया की जांच की गई? इन सवालों का जवाब देना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।
##एक मासूम की मौत, लेकिन जिम्मेदारी तय करने में इतनी देरी क्यों?##
यह महज एक परिवार का दुखद मामला नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा निर्धारित नियमों से हटकर निजी आवास पर उपचार किए जाने की बात सामने आती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं, यदि किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्ति पर नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी प्रभावशाली या विभागीय कर्मचारी से जुड़े मामले में जांच की रफ्तार धीमी पड़ जाती है? क्या प्रशासनिक आश्वासन केवल सुर्खियों तक सीमित रह जाते हैं? एक गरीब परिवार अपने बच्चे को खो चुका है, लेकिन उसे अब तक जांच और जवाबदेही का स्पष्ट परिणाम नहीं मिला है।
##CMHO और जिला प्रशासन से सीधे सवाल##
अब जरूरत केवल जांच का आश्वासन देने की नहीं, बल्कि जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि आर्यन की मौत के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। जांच अधिकारी कौन है, जांच रिपोर्ट कब तक आएगी और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी?
एक मासूम की मौत को फाइलों और आश्वासनों के बीच दबने नहीं दिया जाना चाहिए। प्रशासन को जवाब देना होगा कि आर्यन के परिवार को न्याय कब मिलेगा और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग आखिर क्या कदम उठा रहा है?
