चंद्रहास वैष्णव 
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बस्तर में आई भीषण बाढ़, प्रशासनिक अव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और जमीन घोटाले को लेकर राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर सरकार की विफलता गिनाते हुए तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की।
##बस्तर में 50 साल बाद ऐतिहासिक बाढ़ और प्रशासनिक विफलता##
दीपक बैज ने कहा कि बस्तर में पिछले 50 वर्षों के बाद ऐसी विनाशकारी बाढ़ आई है, जिसने पूरे जनजीवन को तबाह कर दिया है। जगदलपुर का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जलमग्न हो गया और सीमावर्ती नदियों के 5 किलोमीटर के दायरे में भारी तबाही हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहत शिविरों में भोजन, पानी और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी रही और प्रशासन ने समय से पहले ही राहत शिविर बंद कर दिए, जिससे सैकड़ों पीड़ित परिवार भूखे रहने को मजबूर हो गए।
##मुख्यमंत्री के दौरे पर सवाल: “राहत देने नहीं, पर्यटन टूर पर आए थे”##
बैज ने मुख्यमंत्री के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पीड़ितों की मदद करने के बजाय केवल हवाई सर्वेक्षण करने, पुल पर फोटो खिंचवाने और नक्शे देखने तक सीमित रहे। उन्होंने कहा कि सरकार की असंवेदनशीलता इस बात से दिखती है कि बस्तर की जनता संकट में है और मुख्यमंत्री सिंगापुर के दौरे पर चले गए।
##अपर्याप्त मुआवजा नीति: “ऊंट के मुंह में जीरा”##
बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे को नाकाफी बताते हुए बैज ने कहा कि आरबीसी 6-4 के तहत कच्चे-पक्के मकानों और घरेलू सामानों का दिया जा रहा मुआवजा अत्यंत कम है।
* पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए न्यूनतम 5 लाख रुपये और आंशिक क्षति के लिए 1 लाख रुपये दिए जाएं।
* घरेलू सामान और पशुधन (गाय, बैल, भैंस) की क्षति का वर्तमान बाजार दर के आधार पर वास्तविक मूल्यांकन कर मुआवजा दिया जाए, क्योंकि 2500 या 37000 रुपये में नुकसान की भरपाई संभव नहीं है।
* बाढ़ में बहे स्कूली बच्चों के बस्ते, किताबें और अंकसूची संबंधित विभागों द्वारा विशेष शिविर लगाकर दोबारा निशुल्क उपलब्ध कराए जाएं।
##किसानों की बर्बादी और कर्ज माफी की मांग##
लाखों एकड़ धान की फसलें गाद और पानी भरने से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। बैज ने मांग रखी कि:
* प्रति हेक्टेयर दिए जा रहे 8500 रुपये के नाममात्र मुआवजे को बदलकर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान उत्पादन के हिसाब से लगभग 65,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाए।
* फसलें पूरी तरह नष्ट होने के कारण प्रभावित किसानों के सभी बैंक व सहकारी कर्ज तुरंत माफ किए जाएं।
##इंद्रावती जल बंटवारा और डबल इंजन सरकार की नाकामी##
ओडिशा बांध से बिना पूर्व सूचना के 8-9 गेट खोले जाने से बस्तर में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई। बैज ने सवाल उठाया कि जब दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, तो तालमेल क्यों नहीं दिखा? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महानदी पर तो बात करते हैं, लेकिन बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी के जल बंटवारे पर चुप्पी साधे हुए हैं। साथ ही उन्होंने देउरगांव और मटनार बैराज परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की बात कही ताकि बस्तर को जल संकट और बाढ़ दोनों से राहत मिले।
##राशन वितरण और आसमान छूती महंगाई##
पीडीएस दुकानों में पिछले 6 महीनों से चना और गुड़ का वितरण ठप होने तथा शक्कर की किल्लत का आरोप लगाते हुए बैज ने कहा कि सरकार आम जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही है। कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडरों के दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे छोटे व्यापारियों और गरीब जनता का जीवन मुहाल हो गया है।
##बस्तर पंडुम और मंत्री की जमीन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप##
दीपक बैज ने ‘बस्तर पंडुम’ आयोजन को करोड़ों रुपये का घोटाला बताते हुए कहा कि 24 से 28 लाख रुपये केवल फूल-मालाओं और 23 लाख रुपये रेड कारपेट पर लुटाए गए, जबकि बाढ़ पीड़ितों को महज 10-10 हजार की घोषणाएं दी जा रही हैं।
इसके अलावा उन्होंने वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप पर जमीन घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पत्नी के जरिए कंपनी बनाकर आदिवासी वर्ग की जमीनों की हेराफेरी कर करोड़ों का मुनाफा कमाया गया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
