बाढ़ में बह गई प्रशासन की संवेदनशीलता? राहत के नाम पर दिखावे का आरोप, पीड़ितों में बढ़ा रोष तीन दिन बाद नगर निगम ने संभाली भोजन व्यवस्था, पीड़ितों का दावा—समाजसेवी संगठन और स्थानीय लोग पहले दिन से पहुंचा रहे थे मदद

चंद्रहास वैष्णव

जगदलपुर में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच जिला प्रशासन की राहत व्यवस्था को लेकर अब नाराजगी सामने आने लगी है। बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि आपदा की इस कठिन घड़ी में जहां तत्काल राहत और भोजन की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहां कई सामाजिक संगठनों, निजी संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर पीड़ित परिवारों तक भोजन, पानी और जरूरी सामान पहुंचाया, जबकि प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित तत्परता नजर नहीं आई।

बाढ़ प्रभावित लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से राहत कार्यों को लेकर जमीनी स्तर पर जितनी सक्रियता दिखाई जानी चाहिए थी, वह नजर नहीं आई। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर समाजसेवी और स्थानीय संगठन जोखिम उठाकर प्रभावित इलाकों तक पहुंचे और जरूरतमंद परिवारों की मदद की।

“हम तक पहुंचने के लिए लोग रास्ता बना सकते हैं, प्रशासन क्यों नहीं?”

डोंगाघाट सहित अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों में विशेष नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब निजी लोग और सामाजिक संगठन मुश्किल रास्तों से होकर उनके घरों तक पहुंचकर भोजन और राहत सामग्री दे सकते हैं, तो प्रशासनिक अमला प्रभावित परिवारों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।

लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल दूर से स्थिति का जायजा लेने के बजाय प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी वास्तविक जरूरतों को समझना चाहिए।

मुख्यमंत्री के दौरे पर भी उठे सवाल

बाढ़ प्रभावितों के बीच मुख्यमंत्री के हालिया जगदलपुर दौरे को लेकर भी कुछ लोगों में नाराजगी है। प्रभावितों का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सभी पीड़ित परिवारों से संवाद की उम्मीद थी, लेकिन कुछ परिवारों से मुलाकात के बाद दौरा समाप्त हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी समस्याएं और शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचनी चाहिए थीं।

हालांकि, मुख्यमंत्री के दौरे और प्रशासन की राहत व्यवस्था को लेकर सामने आए इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक पक्ष से होना बाकी है।

राहत कार्यों पर खर्च की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

बाढ़ प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि आपदा के दौरान राहत एवं भोजन व्यवस्था में किए गए खर्च, उपलब्ध कराई गई सामग्री और प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई गई सहायता की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और नगर निगम ने बड़े स्तर पर राहत कार्य किए हैं तो उनकी सूची, स्थान और लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक करने से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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मुश्किल घड़ी में समाजसेवी संगठनों ने संभाला मोर्चा

बाढ़ पीड़ितों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने में स्थानीय संगठनों की अहम भूमिका

बाढ़ की विकट परिस्थिति में शहर के कई सामाजिक संगठनों, निजी संस्थानों और स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर प्रभावित परिवारों की मदद की। कई लोगों ने अपने स्तर पर भोजन तैयार कराया और प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया, वहीं जरूरतमंद परिवारों को पानी, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया गया।

बाढ़ पीड़ित परिवारों ने इन संगठनों और मददगारों का आभार जताते हुए कहा कि संकट की घड़ी में समाज के लोगों ने जिस तरह आगे बढ़कर साथ दिया, वह बस्तर की सामाजिक एकजुटता की मिसाल है।

हर आपदा में बस्तर की जनता बनी एक-दूसरे का सहारा

स्थानीय लोगों का कहना है कि बस्तर में जब भी प्राकृतिक आपदा या संकट की स्थिति बनी है, शहर और आसपास के लोगों ने जाति, धर्म और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर प्रभावित परिवारों की मदद की है। इस बार भी लोगों ने अपने संसाधनों से राहत पहुंचाकर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की है।

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पुलिस और SDRF की भूमिका को लोगों ने सराहा

रेस्क्यू से लेकर प्रभावितों तक पहुंचने तक लगातार मोर्चे पर डटे रहे जवान

बाढ़ के दौरान पुलिस विभाग और SDRF के जवानों की भूमिका को प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों ने सराहा है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने राहत और बचाव कार्य में सक्रियता दिखाई तथा जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पानी और रास्तों की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, तब पुलिस और SDRF के जवान मौके पर मौजूद रहे और लोगों की सहायता के लिए तत्पर दिखाई दिए।

संकट में सामने आया बस्तर का असली चेहरा

एक ओर जहां बाढ़ ने लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी कीं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संगठनों, निजी संस्थाओं, स्थानीय लोगों, पुलिस और SDRF की सक्रियता ने यह दिखाया कि संकट के समय बस्तर की जनता एक-दूसरे के साथ खड़ी रहती है।

अब बाढ़ प्रभावित परिवारों की मांग है कि जिला प्रशासन भी राहत कार्यों की जमीनी स्थिति और खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करे, ताकि लोगों के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके और राहत व्यवस्था को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो।