*सरदार पटेल मैदान को टुकड़ों में बांटने की साजिश: स्टीमेट कहीं और का, लेआउट कहीं और… भड़के पार्षद-एल्डरमैन ने खोला मोर्चा*

विनोद जैन

बालोद, नई दुनियां। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर बना बालोद का ऐतिहासिक मैदान आज नगर पालिका के अफसरों की कमीशनखोरी और तुगलकी फरमानों के चलते अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी जंग लड़ रहा है। शहर के इस एकमात्र खुले और व्यवस्थित खेल मैदान को क्रिकेट बॉक्स के नाम पर टुकड़ों में बांटकर बर्बाद करने की एक ऐसी साजिश रची गई है, जिसने पूरे खेल जगत और आम नागरिकों में आक्रोश की ज्वाला भड़का दी है। नगर पालिका के पार्षदों और एल्डरमैन ने इस पूरी प्रक्रिया को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सीधे मोर्चा खोल दिया है।

एस्टीमेट कहीं और का, लेआउट कहीं और… यह कैसा खेल?

नगर पालिका के सभापति गोकुल ठाकुर, पार्षद दीपक लोढा और एल्डरमैन नितेश वर्मा ने फाइलों के पन्ने सार्वजनिक करते हुए अफसरों के दोहरे चरित्र को बेनकाब किया। स्वीकृत विस्तृत प्राक्कलन में स्पष्ट लिखा गया है—स्टेडियम के समीप स्थित विद्यमान भूमि (कचरा डंप स्थल) के समतलीकरण कार्य का विस्तृत प्राक्कलन। कागजों में स्टेडियम के पास स्थित किसी बदबूदार कचरा डंप साइट को उपयोगी बनाने का झांसा देकर 7.28 लाख का बजट पास कराया गया। लेकिन फील्ड में निकाय के अफसरों की टीम डंप साइट पर जाने के बजाय सीधे सरदार पटेल मैदान के दर्शक दीर्घा (शेड) के सामने पहुंच गई और समतल जमीन पर चूना डालकर लेआउट सौंप दिया। पार्षदों और एल्डरमैन का सीधा आरोप है कि जब जमीन पहले से समतल है, तो कचरा सफाई और मिट्टी-मुरूम भराव के नाम पर स्वीकृत 7.28 लाख की फर्जी बिलिंग की खुली तैयारी कर ली गई है।

मैदान को टुकड़ों में बांटकर खिलाड़ियों का गला घोंटने की तैयारी;

सरदार पटेल मैदान वह धरोहर है जहां रोजाना युवा अभ्यास करते हैं, एथलेटिक्स और फुटबॉल खिलाड़ी पसीना बहाते हैं। बीच मैदान में 33 मीटर लंबा एवं 14.60 मीटर चौड़ा लोहे का कंक्रीट ढांचा और चेन-लिंक जाली खड़ा करने से पूरे मैदान का दायरा संकरा हो जाएगा। रनिंग ट्रैक और ओपन स्पेस बाधित होने से मैदान टुकड़ों में बंट जाएगा और आने वाले दिनों में यह खेल मैदान न रहकर केवल एक व्यावसायिक परिसर बनकर रह जाएगा।

आधिकारिक फाइलों से उड़े अफसरों के होश;

जनप्रतिनिधियों ने बताया कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर अपलोड आधिकारिक टेंडर फाइल में ऐसी विसंगतियां हैं, जिन्हें देखकर कोई भी सन्न रह जाए। प्राक्कलन के पृष्ठ क्रमांक 1 के मद क्र. 4.1 में साफ दर्ज है—शराब दुकान की अंदरूनी सीमा (बाउंड्री) के लिए। खेल मैदान के प्रोजेक्ट में शराब दुकान का कॉपी-पेस्ट एस्टीमेट चिपका दिया गया।

सहायक अभियंता के दस्तखत गायब;

अपलोड एस्टीमेट के किसी भी पन्ने पर सहायक अभियंता के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। बिना वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी के सत्यापन के 28.74 लाख का टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया, जो पूरी तरह अवैध है। संभाग स्तर (अधीक्षण अभियंता, दुर्ग) से केवल टर्फ, नायलॉन नेट और कैमरे के लिए 6.92 लाख की आंशिक तकनीकी स्वीकृति मिली थी। बिना समेकित टीएस के सीधे 28.74 लाख का टेंडर निकाल दिया गया।

कलेक्टर-सीईओ से पूछिए कहकर जवाबदेही से भागे सीएमओ;

पार्षद दीपक लोढा और एल्डरमैन नितेश वर्मा ने बताया, जब इस मनमाने लेआउट और टुकड़ों में बांटने की साजिश पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए पल्ला झाड़ लिया कि कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से पूछिए। इस पर भड़के पार्षद और एल्डरमैन ने कहा कि यदि निकाय को अफसरशाही के इशारे पर ही चलाना है, तो नगर पालिका की स्वायत्तता का क्या मतलब रह गया है?

आर-पार की जंग का ऐलान: नहीं गड़ेगा एक भी खंभा;

पार्षद और एल्डरमैन ने दो-टूक चेतावनी दी है कि सरदार पटेल मैदान बालोद का स्वाभिमान और गुरूर है। इस ऐतिहासिक धरोहर की छाती पर लोहे का पिंजरा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।