*गुरु-शिष्य का मन मिल जाए तो जीवन महकता है — श्री अक्षयमुनिजी मसा*

विनोद जैन

बालोद। समता भवन में आयोजित चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में शासन दीपक श्री अक्षयमुनिजी मसा ने कहा कि “सद्गुरु का सानिध्य मिलने से जीवन अनमोल बनता है। गुरु-शिष्य का मन और तार जुड़ जाए तो जीवन महक उठता है।” उन्होंने कहा कि गुरु बिना किसी स्वार्थ के ज्ञान प्रदान करता है और शिष्य को महापुरुषों एवं ज्ञानियों की सीख को जीवन में उतारना चाहिए।

श्री अक्षयमुनिजी मसा ने कहा कि आज मनुष्य अनेक संसाधनों के बावजूद तनाव और बोरियत में जी रहा है, जबकि संत सीमित साधनों में भी आत्मसाधना में लीन रहते हैं। “इस जन्म में बुद्धि का कितना भी खेल कर लो, कर्मों का परिणाम भोगना ही पड़ता है।” उन्होंने करुणा, दया, शील, नम्रता और सरलता को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आज के पसीने की एक बूंद कल का मोती है।”

चातुर्मास के दौरान श्री अक्षयमुनिजी मसा की प्रेरणा से त्याग और तपस्या का क्रम लगातार जारी है। अब तक 6 मासक्षमण पूर्ण हो चुके हैं। आज कुसुम सौरभ नाहटा ने 21 उपवास, जबकि नन्ही बालिकाओं वर्णिका लोढ़ा ने 5 तथा सोनाक्षी और यशी लोढ़ा ने 4-4 उपवास की तपस्या का संकल्प जैन मुनि से ग्रहण किया। गुप्त तपस्याएं भी निरंतर जारी हैं।

जैन धर्म का पर्युषण पर्व 8 सितंबर से प्रारंभ होगा।