विनोद जैन 
बालोद – शहर के समता भवन में प्रवचन के दौरान जैन संत श्री अक्षयमुनिजी मसा ने कहा कि “वाणी को वीणा बना लो तो संगीत गूंजेगा और वाणी को बाण बना लो तो महाभारत रचेगा।” उन्होंने कहा कि आज परिवारों में सबसे अधिक विवाद संपत्ति के बंटवारे को लेकर हो रहे हैं, इसलिए प्रेम, मधुरता और संयम को जीवन में अपनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है, इसे व्यर्थ के अहंकार और विवादों में नहीं उलझाना चाहिए। व्यक्ति को सत्य, हितकारी, मधुर, शिष्ट और अहंकार रहित वाणी बोलनी चाहिए। भगवान कृष्ण ने प्रेम की बांसुरी से लोगों का दिल जीता, इसलिए जीवन का सार भी प्रेम ही है।
श्री अक्षयमुनिजी ने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन और धर्म साधना का अवसर है। उनकी प्रेरणा से बालोद में तपस्याओं का क्रम निरंतर जारी है। धर्मसभा में अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास तपस्या के संकल्प ग्रहण किए।
धर्मसभा में राजस्थान के मोरवन-उदयपुर निवासी एवं पूर्व राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शिक्षक महावीर जी भी उपस्थित रहे। उक्तशय की जानकरी प्रदीप चोपडा ने दी
