चंद्रहास वैष्णव 
बस्तर जिले के जगदलपुर महिला थाना पुलिस ने ‘मानवीय पुलिसिंग’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। मानसिक रूप से अस्वस्थ और 3 महीने की गर्भवती एक महिला को पुलिस ने न केवल सुरक्षित रेस्क्यू किया, बल्कि बेहतरीन अंतर-जिला समन्वय स्थापित करते हुए उसे दंतेवाड़ा स्थित उसके परिवार वालों को सकुशल सौंप दिया।
*क्या है पूरा मामला?*
जानकारी के अनुसार, पीड़िता की पहचान श्रीमती दुर्गा यादव (25 वर्ष), पति गोपी यादव के रूप में हुई है। वह दंतेवाड़ा जिले के थाना गीदम अंतर्गत ग्राम सुरोखी की निवासी है। बताया जा रहा है कि महिला को बीच-बीच में मानसिक दौरे पड़ते हैं, जिसके चलते वह मानसिक अस्वस्थता की स्थिति में अपने ससुराल से बिना किसी को बताए निकल गई और भटकते हुए जगदलपुर शहर पहुंच गई।
जब महिला जगदलपुर पहुंची, तो शुरुआत में स्थानीय रिश्तेदारों ने उसे अपने साथ रखने से मना कर दिया। महिला की शारीरिक स्थिति (गर्भवती होने) और उसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, पुलिस ने तत्काल उसे सखी वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित आश्रय दिलवाया।
*वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन और त्वरित कार्रवाई*
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बस्तर पुलिस अधीक्षक श्री शलभ कुमार सिन्हा ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुखनंदन राठौर और उप पुलिस अधीक्षक सुशांता लकड़ा के कुशल मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने तुरंत काम शुरू किया।
महिला थाना प्रभारी निरीक्षक अंजना केरकेट्टा ने तत्परता दिखाते हुए गीदम (दंतेवाड़ा) पुलिस और महिला के परिजनों से संपर्क साधा और घर का सटीक पता लगाया।
*टीम की सराहनीय भूमिका*
परिवार का पता चलने के बाद, महिला थाना स्टाफ की टीम जिसमें उप निरीक्षक पदमनी ठाकुर, महिला प्रधान आरक्षक सावित्री नेताम और पदमा कुंजाम शामिल थीं, ने स्वयं जिम्मेदारी ली। टीम पीड़िता को लेकर दंतेवाड़ा गई और उसे सुरक्षित उसके परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया।
जगदलपुर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई, अंतर्विभागीय समन्वय और संवेदनशीलता की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
