यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर
कांकेर संस्कार भारती इकाई कांकेर द्वारा गुरू पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रति वर्ष गुरु- शिष्य परंपरा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कला के देवता भगवान नटराज की पूजा की जाती है और कला गुरुओं का सम्मान किया जाता है । इकाई द्वारा इस वर्ष *2 अगस्त 2026* को यह *कला गुरु सम्मान* उत्सव * सत्य साईं भवन मांझा पारा काँकेर* में अत्यंत गौरव पूर्ण रूप में मनाया गया।
उत्सव का शुभारंभ कला के देवता भगवान नटराज की पूजा व विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना व दीप प्रज्वलित कर किया गया । माँ सरस्वती वंदना कुलदीप जी ने प्रस्तुत किया । मंचस्थ परमेश्वर चक्रधारी, श्रीमती बसंती चक्रधारी, अध्यक्ष डॉ.श्रीमती गीता शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव एवं शिव सिंह भदौरिया का स्वागत एवं परिचय पश्चात। सभी ने अपने उदबोधन में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु शिष्य परम्परा व कला गुरु सम्मान के महत्व को बताया। *सम्मान गौरव का विषय है मनोरंजन का नहीं।* कला के प्रति रुचि कम लोगों की होती है । इसलिए उपस्थित जनों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती है। अपने उदबोधन में सभी ने कला गुरु सम्मान के आयोजन के महत्व को लेकर इकाई के प्रयासों की प्रसंशा की। इस अवसर पर श्रीमति मंजू शर्मा ने गुरु शिष्य पर अपने उदगार रखे तो रिजेंद्र गंजीर ने संक्षिप्त कविता से समा बांध दिया।
*बासंती बेला में अनमोल, ज्ञान गीता यहाँ पर है।*
*पंच परमेश्वर हैं मंचस्थ, शिव गर्जना यहाँ पर है।*
*स्वर्णिम पल गुरु पूर्णिमा, सुरेश दैदीप्यमान यहाँ पर है।*
*अवधपति रामशरण मिल जाय, गोपी संतोष यहाँ पर है।*
*सुगंधित गुलाब, मंजू, कुलदीप, सत्य साईं यहाँ पर है।*
*अविस्मरणीय पल अभिनव, रीना, राज गोवर्धन यहाँ पर है।*
*सुनीता, शीला, ललिता कांता, सोनू संस्कार यहाँ पर है।*
यहाँ उल्लेखनीय है कि कला (टेराकोटा) के बेजोड़ शिल्पकार श्री परमेश्वर चक्रधारी, ग्राम बांसला भानुप्रतापपुर जिला कांकेर के निवासी हैं, जो कि लगभग डेढ़ दशक से अधिक समय से वे मूर्तिकला व टेराकोटा के शिल्पकार हैं । उनकी यह कला, लंबी कला साधना, अनुभव, शिक्षण- प्रशिक्षण एवं संघर्षों से यात्रा करती विभिन्न राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करते हुए राष्ट्र स्तरीय सम्मान के द्वार तक पहुँच गई है और नामांकित की गई है । यह काँकेर जिले के लिए बेहद ख़ुशी और गर्व की बात है । परमेश्वर जी इस कला को मिट्टी की इस सुगंध को जीवंत तो रख रहे हैं, पर उनके ऐसे शिष्य शायद थोड़े है, यह बताते समय खुशी से आँखे छलक आई की उनकी एक शिष्या के हाथों से गढ़ी गई आदिवासी घोटुल की माटी कला राज्य स्तरीय सम्मान के लिए नामांकित की गई हैं और उनकी ये शिष्या उनकी धर्म पत्नी श्रीमती बसंती चक्रधारी है।
तत पश्चात सम्मान उत्सव प्रारंभ हुआ और युवा मूर्तिकला टेराकोटा शिल्पकार श्री परमेश्वर चक्रधारी का श्री रामशरण जैन ने तिलक चंदन से वन्दन किया और इकाई द्वारा शॉल, श्रीफल, मोमेंटो, कला गुरु सम्मान पत्रक, नगद राशि भेंट कर भव्य रूप से करतल ध्वनि के साथ सम्मान किया गया। अविस्मरणीय पल में उनके साथ उनकी धर्म पत्नी बसंती चक्रधारी का अभिनंदन शॉल, श्रीफल भेट कर दोनों को शुभकामनाएं दी गई।
इस ऐतिहासिक पल को सत्य साँई बाबा समिति के भजन मण्डली द्वारा भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनों में श्रद्धा व आनंद की अनुभुति का संचार कर दिया।
उत्सवमय समापन के वातावरण में अवधेश लारिया ने इस सफल कार्यक्रम के लिए इकाई के सभी दायित्ववान व संस्कार मित्रों, उपस्थित जनों का हार्दिक आभार व्यक्त किया । इसी दौरान परमेश्वर जी की उत्कृष्ट टेराकोटा शिल्प कला और बसंती चक्रधारी जी की श्रेष्ठ माटी कला को लेकर जल्द ही एक राज्य स्तरीय मूर्तिकला व टेराकोटा शिल्प कला की कार्यशाला सह प्रशिक्षण आयोजित करने की योजना पर दोनोँ ने सहमति दी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रांत मंत्री रिजेंद्र गंजीर मय कुशल मंच संचालन, महामंत्री अवधेश लारिया, श्रीमती मंजू शर्मा, उपाध्यक्ष, श्रीमती रीना लारिया, कोष प्रमुख रामशरण जैन, संतोष श्रीवास्तव, कुलदीप
, गोपी रमानी एवं गरिमामयी उपस्थिति भजन साँई समिति के जगदीश, मरावी, श्रीमती ललिता केमरो,. गोवर्धन नेताम. राज सिंह मण्डावी, सुरेश रायकवार, श्रीमती शीला जैन , सुनीता शर्मा, कांता मोटवानी, गुलाब साहू, सोनू व साथी की रही।
