चंद्रहास वैष्णव 
जगदलपुर: आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा छत्तीसगढ़ में एक भव्य धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। सदियों पुराने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के 11 पवित्र विग्रहों की यात्रा छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से बस्तर (जगदलपुर) से प्रारंभ होगी।
क्या है ऐतिहासिक महत्व?
आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े हैप्पी मग्गू ने प्रेस वार्ता में बताया कि ये विग्रह उस प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का हिस्सा हैं, जिसकी स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। उन्होंने इसके इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया:
हवा में तैरता शिवलिंग: प्राचीन सोमनाथ शिवलिंग अपनी अद्भुत चुंबकीय शक्ति के कारण हवा में तैरता रहता था।
गजनवी का आक्रमण: लगभग 1000 वर्ष पूर्व महमूद गजनवी ने इस मंदिर को खंडित किया था।
गुप्त सुरक्षा: आक्रमण के समय ‘अग्निहोत्री’ परिवारों ने इसके टुकड़ों (विग्रहों) को दक्षिण भारत ले जाकर सदियों तक गुप्त रूप से उनकी पूजा की।
भविष्यवाणी: कांची के शंकराचार्य ने निर्देश दिया था कि राम मंदिर की स्थापना के बाद, दक्षिण के एक संत (जिनके नाम में शंकर होगा) को ये विग्रह सौंप दिए जाएं। इसी क्रम में 15 जनवरी 2025 को अग्निहोत्री परिवार ने ये विग्रह श्री श्री रविशंकर को सौंपे।
छत्तीसगढ़ यात्रा का विवरण
सोमनाथ के इन विग्रहों को पुनः सोमनाथ मंदिर में स्थापित किया जाना है, लेकिन उससे पूर्व पूरे भारत में इनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए भ्रमण कराया जा रहा है।
प्रारंभ: 20 अप्रैल, 2026।
अवधि: छत्तीसगढ़ में यह यात्रा कुल 10 दिनों तक चलेगी।
मुख्य कार्यक्रम: जगदलपुर के बाल विहार स्कूल में शाम 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक विशेष आयोजन होगा।
भक्तों के लिए विशेष अवसर
इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को न केवल दुर्लभ विग्रहों के दर्शन करने का सौभाग्य मिलेगा, बल्कि रुद्राभिषेक, सत्संग और सामूहिक ध्यान में शामिल होने का अवसर भी प्राप्त होगा। संस्था ने सभी धर्मप्रेमियों से इस आध्यात्मिक यात्रा का लाभ उठाने की अपील की है।
