दीपक विश्वकर्मा
।
मनेन्द्रगढ़। आपको अचानक से करोड़ों की संपत्ति मिल जाये तो आपके होश ही उड़ जायेगें। आप सोचेगें काम करने का क्या फायदा और काम करना भी क्यों है जब बैठे-बिठाए इतना मिल गया लेकिन ऐसे में क्या आप कभी उन पैसों की कदर कर पाएगें? तो जवाब है नहीं। कदर करना तो दूर की बात है हम मेहनत और संघर्ष जैसे शब्दों के मायने भी भूल जायेगें। चूंकि हम अधिकांश उसी चीज की कद्र करते है जो हमें मेहनत और कड़े संघर्ष के बाद मिली होती है।
उक्त बातें तरक्की एक पहचान संस्था की फाउंडर अध्यक्ष समाजसेवी कनुप्रिया अग्रवाल एनजीओ से जुडी महिलाओं को सम्बोधित करते हुये व्यक्त कर रहीं थीं। एमसीबी जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में महिलाएं गृह उद्योग चला कर सफलता की कहानी गढ़ रहीं हैं। समूह की महिलाएं कठोर परिश्रम कर अपनी किस्मत को बदलने के साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हुए बेहतर स्वरोजगार की ओर बढ़ रही हैं। यहां महिलाओ की स्थिति में हमेशा सुधार की कोशिश में लगी प्राइवेट एनजीओ “तरक्की एक पहचान ” के माध्यम से कनुप्रिया अग्रवाल स्व सहायता समूह की महिलाओं को प्रेरित करते हुए उनमें स्वावलम्बन के माध्यम से आगे की राह दिखा रही हैं।
कोरोना काल में जब लोग घर पर बैठने के लिए मजबूर हो गये तब महिलाओ की हालत सुधारने के लिए कनुप्रिया ने महिलाओ को जोड़कर तरक्की एक पहचान नामक एनजीओ बनाया। शुरुआत में राधा सरकार, समीना खातून, शना कौसर, भूमि शेजपाल ने महिलाओ को जोड़ने का काम शुरू किया। देखते ही देखते लोग आते गये और कारवा बनता गया। महिलाओ ने शुरुआत में घर पर ही आलू के पापड़, चिप्स, साबूदाना की स्टिक, चने का पापड़, मूंग का पापड़ बनाना शुरू किया। बेहतरीन स्वाद के चलते माँग बढ़ने लगी और रोजाना लगभग 2 क्विंटल आलू की खपत होने लगी। इसके अलावा महिलाओ ने घर पर कपड़ो के बैग बनाने का काम शुरू किया जो अच्छा चल निकला साथ ही साथ इन्हीं महिलाओं ने आम, कटहल, लहसुन, अदरक का अचार भी बनाना शुरू किया जिसकी भी अच्छी डिमांड आने लगी। अब मनेन्द्रगढ़ के साथ ही साथ लेदरी, राजनगर के अलावा राजधानी रायपुर में इनके बनाये उत्पाद की माँग होने लगी है। बढ़ती माँग को देखते हुये कनुप्रिया अग्रवाल ने राधा सरकार लेदरी को संस्था अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है। संस्था के सदस्यों का कहना है कि जिस तरह से लगातार महिलाओं और युवतियों की संख्या बढ़ रही है अगर उन्हें एक हॉल स्थानीय प्रशासन अथवा जिला प्रशासन द्वारा मुहैया करा दिया जाये तो वह महिलाओं को आगे बढ़ाने व उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा।
इस अवसर पर संस्था की अध्यक्ष राधा सरकार ने कहा कि संघर्ष के बिना जिंदगी जीना यानी बिना मेहनत के फल खाने जैसा है। संघर्ष युवा साथी को सोना बनाता है और जिंदगी की भट्टी में जब वह अनुभव के साथ तपता है तब जिंदगी का असल अर्थ उसे समझ में आता है। अनुभव का कोई विकल्प नहीं है। यह हम सुनते भी हैं और बात सही भी है पर यह बात भी उतनी ही सही है कि अगर आप संघर्ष करना नहीं जानते तब जिंदगी में आगे बढऩे की ललक भी स्वयं में समाप्त कर देंगे।
संस्थान से जुडी समीना खातून ने कहा कि जिंदगी में संघर्ष सभी स्तरों पर है। आप चाहे कैरियर की बात करें या नौकरी की या फिर स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की बात हो बिना संघर्ष किये कोई भी मुकाम हासिल नहीं कर सकते। संघर्ष अपने साथ बहुत सारी बातें लाता है जिसमें मेहनत से लेकर विपरित परिस्थितियों से सामना करना भी शामिल रहता है।यदि आप सफलता की गहराई में पहुंच चुके हैं तो आप खुशकिस्मत हैं कि अब आपकी यात्रा केवल एक ही दिशा में होगी और वह है ऊपर की ओर।
सना कौसर ने कहा कि अनूठे सकारात्मक चिंतन को दर्शाता नार्मन विसेंट पील का उक्त मूलमंत्र असफलताओं से घिरे व्यक्ति की इच्छा-शक्ति को जगा सकता है। असफलता एक सामान्य प्रक्रिया है और यदि असफलताओं को सकारात्मक नजरिये से देखा जाये तो ये बेहद रचनात्मक साबित हो सकती है। यदि आप असफलताओं के दौर से गुजर रहे हैं तो ये कुछ कारगर उपाय अपनाकर आप भी ऊचांई की सीढ़ी पर चढ़ सकते हैं लेकिन इस राह को पार करने के लिए मेहनत और संघर्ष तो करना ही पड़ेगा साथ ही संयम भी रखना जरूरी होगा। भूमि सेजपाल ने कहा कि सफलता की राह में असफलताएं भी अवश्य आती है और जो मंजिल असफलताओं के बाद मिलती है उनकी बात ही कुछ और होती है। कहते हैं हर बाधा को पार करते ही एक अवसर आपका इंतजार कर रहा होता है। बस आप उम्मीद का दामन थामे रहिए। असफलता के कड़वे घूंट में सृजन के तत्व समाए रहते हैं। इसलिए बहुत बार असफलता किसी महत्वपूर्ण रचनात्मक कार्य की शुरुआत बन भाग्योदय की वजह बन जाती है। यदि आप असफलताओं के दौर में हैं तो धैर्यपूर्वक अपना उत्साह पूर्ववत कायम रखें।
