छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना की “बालोद हरेली रैली” कल — छत्तीसगढ़ी संस्कृति और अस्मिता के रंग में रंगेगा बालोद

विनोद जैन

बालोद, 22 अगस्त 2026।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा, बोली-भाषा और छत्तीसगढ़ियावाद की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना द्वारा लगातार छठवें वर्ष “बालोद हरेली रैली” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन रविवार, 23 अगस्त 2026 को बालोद शहर में किया जाएगा।

हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी, खेती-किसानी, लोकजीवन और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए आयोजित होने वाली इस रैली में जिलेभर से छत्तीसगढ़िया समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

लोक संस्कृति की भव्य झलकियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र

रैली में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति देखने को मिलेगी। कार्यक्रम में बस्तरिहा मांदरी नृत्य, वनांचल गेड़ी नृत्य, पंथी नृत्य, राऊत नाचा, करमा नृत्य, डंडा नृत्य, अखाड़ा प्रदर्शन, सुआ नृत्य, कमार नृत्य एवं गम्मतिहा नाचा दल सहित विभिन्न लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

इसके साथ ही बैलगाड़ी का भव्य जुलूस हरेली पर्व की पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति और छत्तीसगढ़ की कृषि प्रधान पहचान को प्रदर्शित करेगा। रैली में छत्तीसगढ़ महतारी एवं लोक संस्कृति की झांकी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।

ठेठवार भवन से निकलेगी रैली

आयोजकों के अनुसार 23 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 10 बजे रैली ठेठवार भवन, गंजपारा बालोद से प्रारंभ होगी और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सरदार पटेल मैदान, बालोद पहुंचेगी, जहां रैली के पश्चात सभा का आयोजन किया जाएगा।

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने जिले के सभी छत्तीसगढ़िया भाई-बहनों, सामाजिक संगठनों, युवा साथियों, किसान-मजदूरों एवं समस्त समाज से अपील की है कि वे अपने पारंपरिक वेशभूषा और छत्तीसगढ़िया संस्कृति के साथ अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर “बालोद हरेली रैली” को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाएं।

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का संदेश स्पष्ट है—अपन बोली, अपन संस्कृति, अपन माटी अउ अपन पहचान के सम्मान के लिए छत्तीसगढ़िया समाज एकजुट होकर आगे बढ़े।

रैली में शामिल होकर छत्तीसगढ़ी संस्कृति के गौरव को मजबूत करें।