विनोद जैन 
बालोद। समता भवन बालोद में प्रवचन श्रृंखला के दौरान शासन दीपक श्री अक्षयमुनिजी मसा ने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, बाहरी परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन मन की स्थिति हमारे हाथ में होती है। व्यक्ति यदि अपने मन को संभाल ले तो विपरीत परिस्थितियों में भी सुखपूर्वक जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अभाव और प्रभाव में नहीं, बल्कि अपने स्वभाव में जीना चाहिए। धर्म, अनुशासन और नीति के मार्ग पर चलना ही जीवन की सच्ची दिशा है।
उन्होंने कहा कि निरंतर धर्म के संपर्क में रहने से ज्ञान बढ़ता है। बदलते समय और संस्कृति के बावजूद धर्म का महत्व सदैव बना रहेगा। अहिंसा भारतीय संस्कृति की मूल भावना है और हमें उसके अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।
बालोद में धर्ममय वातावरण के बीच त्याग, तपस्या और आराधना का क्रम जारी है। बुधवार को श्री अक्षयमुनिजी मसा से इंदिरा देवी बाफना ने 24, काजल नाहर ने 23, शर्मिला बाफना ने 22, स्नेहल लोढ़ा एवं प्रिया श्रीश्रीमाल ने 20, नमिता नाहटा ने 17, ईशा तातेड ने 16, पूनम लोढ़ा ने 9 तथा हेतल गोलछा ने 4 तपस्या का प्रत्याख्यान संकल्प ग्रहण किया। इसके अलावा कई गुप्त तपस्याएं भी जारी हैं।
