धर्मांतरण पर सख्ती: सुकमा के एर्राबोर में ईसाई प्रचारकों की ‘नो-एंट्री’, ग्राम सभा ने लगाया प्रतिबंध का बैनर

चंद्रहास वैष्णव

पेसा (PESA) कानून और पांचवीं अनुसूची का हवाला देकर आदिवासी संस्कृति को बचाने की पहल, प्रार्थना सभाओं पर भी लगी पूर्ण रोक।

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल सुकमा जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले के एर्राबोर गांव की ग्राम सभा ने अपनी मूल संस्कृति और रूढ़िवादी परंपराओं के संरक्षण का हवाला देते हुए गांव में ईसाई पास्टरों, पादरियों और बाहरी धर्मांतरित लोगों के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। इस कड़े फैसले को सार्वजनिक करते हुए गांव में एक विशाल बैनर लगाया गया है, जो अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

*संविधान और पेसा कानून (1996) का दिया गया है हवाला*
ग्राम सभा द्वारा लगाए गए इस बैनर में सीधे तौर पर कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का जिक्र किया गया है। बैनर की इबारत के अनुसार:

ग्राम एर्राबोर (थाना एर्राबोर, जिला सुकमा) भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
यहां पेसा (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 लागू है।
इस अधिनियम के तहत ग्राम सभा को अपनी जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ अपनी परंपरा और रूढ़िवादी संस्कृति का संरक्षण करने का विशेष अधिकार प्राप्त है।

ग्राम सभा के प्रस्ताव में लागू किए गए प्रमुख प्रतिबंध:
अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर गांव में निम्नलिखित गतिविधियों पर रोक लगा दी है:
* ईसाई धर्म के पास्टरों और पादरियों का एर्राबोर गांव में प्रवेश पूरी तरह से वर्जित रहेगा।
* गांव के बाहर से आने वाले किसी भी धर्मांतरित व्यक्ति को गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
* गांव की सीमा के भीतर ईसाई धर्म से जुड़ी कोई भी प्रार्थना सभा या किसी भी प्रकार का योजनाबद्ध धार्मिक आयोजन नहीं किया जा सकेगा।

बस्तर क्षेत्र में गहराता धर्मांतरण का मुद्दा
बैनर के निचले हिस्से में निवेदक के तौर पर ‘ग्राम सभा प्रस्ताव, ग्राम – एर्राबोर’ लिखा गया है। गौरतलब है कि पूरे बस्तर संभाग में धर्मांतरण और मूल आदिवासी संस्कृति के संरक्षण को लेकर लंबे समय से बहस और खींचतान जारी है। पेसा कानून के तहत मिले अधिकारों का उपयोग कर ग्राम सभा द्वारा इस तरह का बैनर लगाया जाना इस बात का संकेत है कि स्थानीय आदिवासी समाज अपने सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर अब अधिक मुखर और सख्त हो रहा है। प्रशासन और पुलिस की इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना अहम होगा।