चंद्रहास वैष्णव 
प्रदेश भर में नकली डेयरी उत्पादों और मिलावटखोरी पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य की किसी भी दुकान, होटल, रेस्टोरेंट या व्यावसायिक संस्थान में ‘एनालॉग पनीर’ की बिक्री और उपयोग की अनुमति नहीं होगी।
*लगातार शिकायतों के बाद लिया गया फैसला*
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि लंबे समय से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से नकली पनीर, मिलावटी दूध और इससे बने अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग की टीमें लगातार कार्रवाई और छापेमारी कर रही थीं, लेकिन एनालॉग पनीर के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही थी।
असली पनीर के नाम पर पाम ऑयल, स्टार्च और केमिकल्स से तैयार एनालॉग पनीर को बाजार में बेचा जा रहा था, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा था।
*क्या है ‘एनालॉग पनीर’ और क्यों है यह हानिकारक?*
एनालॉग पनीर शुद्ध दूध से नहीं बनता। इसे बनाने के लिए वनस्पति तेल (जैसे पाम ऑयल), स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।
दिखावे में असली जैसा: यह दिखने और बनावट में बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसमें दूध के प्राकृतिक पोषक तत्व (जैसे कैल्शियम और प्रोटीन) नहीं होते।
स्वास्थ्य के लिए जोखिम: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, सस्ते पाम ऑयल और केमिकल्स से बने इस पनीर का नियमित सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने, दिल की बीमारियों और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
ग्राहकों से धोखाधड़ी: लागत बेहद कम होने के कारण कई होटल, ढाबे और दुकानदार असली पनीर की कीमत पर एनालॉग पनीर परोसकर मुनाफा कमा रहे थे।
*सख्त चेकिंग और लाइसेंस रद्द करने के निर्देश*
स्वास्थ्य मंत्री के इस ऐलान के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को पूरे राज्य में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं:
औचक निरीक्षण: डेयरी दुकानों, सुपरमार्केट, कैटरर्स और होटल-रेस्टोरेंट में औचक छापेमारी की जाएगी।
सैंपलिंग और जांच: संदिग्ध खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर तत्काल राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
कड़ी कानूनी कार्रवाई: यदि कोई दुकान या संस्थान एनालॉग पनीर बेचते या उपयोग करते पाया गया, तो उसका लाइसेंस तुरंत निलंबित या रद्द किया जाएगा और उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत मामला दर्ज होगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने आम जनता से भी अपील की है कि वे जागरूक रहें और किसी भी तरह की मिलावट या नकली खाद्य पदार्थों की जानकारी मिलने पर तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित करें, ताकि मिलावटखोरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जा सके।
