विनोद जैन 
बालोद – जिला मुख्यालय के पालिका प्रशासन में इन दिनों नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है। मामला प्लेसमेंट टेंडर का है, जहां मोटे कमीशन की खुशबू के आगे सरकारी नियम-कायदे पूरी तरह घुटने टेक चुके हैं।
विभागीय नियम स्पष्ट कहता है कि निविदा (टेंडर) खुलते ही प्राप्त दरों को तत्काल निविदा समिति के सामने रखा जाए और अधिकतम 03 दिनों के भीतर समिति से अनुशंसा लेकर सक्षम प्राधिकारी को दर स्वीकृति के लिए फाइल भेज दी जाए।
लेकिन, जब नीयत में खोट और जेब में नोट भरने की चाहत हो, तो 3 दिन की समय-सीमा कब 28 दिन में बदल जाती है, पता ही नहीं चलता!
प्लेसमेंट का टेंडर बीते 26 जून को खोला गया था। कायदे से जून के अंत तक नई दरों को मंजूरी मिल जानी चाहिए थी। लेकिन आज 24 जुलाई बीत जाने के बाद भी फाइल टस से मस नहीं हुई है।
लगभग एक महीना होने को है, पर न तो निविदा समिति की अनुशंसा ली गई और न ही सक्षम प्राधिकारी के पास दर स्वीकृति का प्रकरण भेजा गया।
