चंद्रहास वैष्णव
छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों के लगातार काउंटर नक्सल अभियान और शासन की पुनर्वास नीति के असर से माओवादियों का आत्मसमर्पण जारी है। इसी क्रम में कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय समिति सदस्य और प्रवक्ता रहे मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ़ भूपति ने हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में अपने 60 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया।
शनिवार को जारी एक वीडियो संदेश में भूपति ने शेष माओवादियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा —
“हम वर्षों से इस आंदोलन में रहे, कई साथियों को खोया। अब यह समय बदलते हालातों को स्वीकारने का है। जनता के बीच जाकर काम करना ही असली बदलाव है।”
भूपति ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सैकड़ों माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं, जबकि तेलंगाना में पार्टी सदस्य चंद्र अन्ना ने भी पुनर्वास योजना का लाभ लिया है। उन्होंने कहा कि अब “हथियारबंद संघर्ष जनता से दूरी का कारण बन गया है” और इसे त्यागना ही सही मार्ग है।
अपने संदेश में भूपति ने कहा कि पार्टी नेतृत्व अभी भी परिवर्तन के लिए तैयार नहीं है, जो उसकी “कठमुल्ला सोच” को दर्शाता है। उन्होंने देशभर के माओवादियों से आग्रह किया —
> “आप सब हथियार छोड़ें, जनता के बीच आएं और राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हों।”
भूपति ने अपने और साथी रुपेश के संपर्क नंबर भी सार्वजनिक करते हुए कहा कि जो भी आत्मसमर्पण कर शांति की राह पर आना चाहता है, वह उनसे संपर्क कर सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, भूपति का यह कदम और बयान नक्सल आंदोलन के भीतर जारी विचारधारात्मक बदलाव और आंतरिक विघटन का संकेत है। इसे नक्सल उन्मूलन अभियान की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
