*फरसगांव में महिला टीचर का जज्बा, 16 वर्षों से रोजाना 3 किमी पैदल चलकर आती हैं स्कूल…..*

भरत भारद्वाज

फरसगांव:- बच्चों का भविष्य गढ़ने में शिक्षकों की मेहनत और जज्बे का कोई सानी नहीं होता। ऐसे कई शिक्षक हैं, जो नौनिहालों को काबिल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। टीचर्स डे के मौके पर हम आपको एक ऐसी महिला शिक्षिका की कहानी बता रहा है, जो पिछले 16 साल से रोजाना 3 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर स्कूल पहुंच रही हैं। और पैदल चलकर ही स्कूल से घर वापस भी लौटती हैं। उन्होंने बातचीत करते हुए शिक्षकीय जीवन से जुड़े अपने कुछ अनुभव साझा किए हैं।

*जानिए क्या है वेदबती ठाकुर की कहानी-*

जी हां, 52 वर्षीय वेदबती ठाकुर फरसगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पतोड़ा के कुम्हारपदर आदर्श स्कूल में प्रधानाध्यापिका हैं, जो कि फरसगांव के रावणभाठा में रहती हैं। ये पिछले 16 साल से ऐसे ही 3 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर नौनिहालों की तकदीर संवारने स्कूल तक पहुंचती हैं। जंगली जानवरों की आवाजें, सांप बिच्छू का डर, मूसलाधार बारिश और जेठ की गर्मी भी इनके पैर नहीं रोक पाई। और यह अब इनकी दिनचर्या में शामिल हो चुका है।

*पढाई के साथ साथ सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है-*

इस बारे में बातचीत करते हुए प्रधान अध्यपिका वेदबती ठाकुर ने बताया कि वर्ष 1993 में मैंने शिक्षकीय सेवा जॉइन किया था। तब से आज तक मैं शैक्षणिक कार्यों के साथ साथ स्वास्थ्य सम्बंधित बातों के बारे में भी बच्चों को जागरूक करती हूँ। चूंकि व्यक्तिगत रूप से मुझे पैदल चलना काफी पसंद है, इसलिए मैं रोजाना 6-7 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आना जाना करती हूँ। इस आधुनिकता के दौर में लोग अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते। जिसके कारण कई प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं। मेरा मानना है कि स्वस्थ्य जीवन और बेहतर स्वास्थ्य के लिए पैदल चलना बहुत जरूरी है।

*गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बच्चों का अधिकार है-*

शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में प्रधान अध्यपिका वेदबती ठाकुर ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, यह उनका अधिकार भी है। खास तौर पर ग्रामीण इलाकों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता के साथ शिक्षा मिले यही हमारा प्रयास भी रहता है। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे मन लगाकर पढ़ें और आने वाले समय मे डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर, एसपी और जनप्रतिनिधि जैसे बड़े पदों पर जाएं।