*शहर के बच्चो को क्यों रहता है चाकलेट वाले अंकल का इंतजार,,,,,आखिर कौन है वह शख्स जो बच्चो का हो गया प्यारा*

विनोद जैन

बालोद । शहर के कुछ मोहल्लों में छोटे छोटे बच्चो को खेलते या स्कूल से आते जाते देख एक शख्स उनके बीच जाकर उनका नाम पूछता है फिर सभी बच्चो को अपने जेब से चाकलेट निकालकर देता है किसी बच्चे से स्कूल में पढ़ाई जाने वाली कविता सुनता है किसी से पहाड़ा और छोटे बच्चो से ABCD या अ आ इ ई क्यो शहर के बच्चो में चाकलेट अंकल का रहता है इंतजार शहर के बाल उद्यानों में खेलने वाले बच्चो के बीच चाकलेट बांटते दिखता है वह शख्स आखिर है कौन पता करने पर जानकारी मिलती है वह कोई और नही बल्कि बालोद सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी है जो बच्चो से बेहद प्यार करते हैं और हमेशा उनकी जेब और गाड़ी में बच्चो के लिए चॉकलेट रहती है यह बात उनके कोतवाली थाने में पदस्थ अन्य सिपाही से पता चली जब इस बाबत कोतवाली प्रभारी रविशंकर पांडेय से हमारे प्रतिनिधि ने पूछा तो पहले वह टाल मटोल करते नजर आए बाद में काफी जद्दोजहद के बाद उन्होंने बताया कि बच्चे मन के सच्चे होते हैं उन्हें प्यार और दुलार करने में आनन्द की अनुभूति होती है यह मैं कोई लोकप्रियता पाने के लिए नही करता बस बच्चो से एक अलग लगाव मुझे उन तक खींच लेता है

बालोद शहर के कुछ बाल उद्यानों में रात्रि में अपने परिवार के साथ खेलने जाने वाले बच्चो को अपने चाकलेट अंकल का इंतजार रहता है वहीं दो दिन पूर्व मौर्या मंडल गणेश समिति के मूर्ति विसर्जन के दौरान थाना प्रभारी पांडेय पुलिस लाईन और गांधी प्रतिमा के निकट विसर्जन रैली को देखते खड़े बच्चो को जब चाकलेट बांटते हुए लोगो ने देखा तो बरबस ही सबको आश्चर्य हुआ अपनी जेब से खूब सारी चाकलेट निकाल सभी बच्चो को दुलारते हुए उन्हें चाकलेट दे रहे थे थाना प्रभारी के जेब की चाकलेट जब खत्म हुई तो अपने वाहन से उन्होंने और चॉकलेट मंगवाया और फिर सभी बच्चो को दिए यही वजह है कि शहर के बच्चो के बीच चाकलेट अंकल के नाम से थाना प्रभारी पहचाने जाते हैं कुछ बच्चे उन्हें देखते ही आगे बढ़कर नमस्ते कहते हैं और बाकायदा हाथ भी मिलाते है चाकलेट लेकर उन्हें थैक्यू कहकर चले जाते हैं उसी तरह सड़क में रात्रि गस्त के दौरान क्रिकेट खेलने वाले युवाओ के बीच जाकर उनके साथ क्रिकेट खेलने लग जाते हैं इन सबके कारण उनकी लोकप्रियता शहर में बनी हुई है युवा वर्ग भी किसी भी परेशानी पर सीधे उनसे बात करने में झिझक नही रखते पर एक बात वे हमेशा कहते हैं कि कोई भी काम कानून के दायरे और निर्देश का पालन करते हुए करना सभी का दायित्त्व होता है और उसके लिए वह हमेशा तैयार रहते हैं

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