चंद्रहास वैष्णव 
प्रतिबंधित संगठन CPI (Maoist) के बीबीएम (बलांगीर–बरगढ़–महासमुंद) डिवीजन के 15 सदस्यों ने हथियार सहित आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई है। डिवीजन की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बदलती आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में दीर्घकालीन सशस्त्र संघर्ष जारी रखने का औचित्य नहीं रह गया है, इसलिए भारतीय संविधान के दायरे में रहकर काम करना बेहतर विकल्प है।
पत्र में स्वयं को “विकास”, पश्चिम सब-जोनल ब्यूरो सचिव, ओडिशा राज्य कमेटी तथा बीबीएम डिविजनल कमेटी सचिव बताते हुए लिखा गया है कि वे छत्तीसगढ़ सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। उन्होंने Vijay Sharma से रेडियो के माध्यम से सुरक्षा की सार्वजनिक गारंटी देने की अपील की है। आश्वासन मिलने के बाद 2-3 मार्च तक महासमुंद जिले में आत्मसमर्पण करने की बात कही गई है।
15 सदस्य तैयार, मार्च की शुरुआत में आ सकते हैं सामने
पत्र के अनुसार, समूह में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 14 छत्तीसगढ़ और 1 तेलंगाना का बताया गया है। संगठन के भीतर सामूहिक निर्णय की प्रतीक्षा का जिक्र करते हुए कहा गया है कि अलग-अलग आत्मसमर्पण की बजाय पूरी पार्टी द्वारा सशस्त्र संघर्ष त्यागने की घोषणा बेहतर होगी, हालांकि केंद्रीय नेतृत्व की ओर से ऐसा संकेत नहीं मिलने पर डिवीजन स्तर पर निर्णय लिया गया है।
सरकार से तीन प्रमुख मांगें
पत्र में आत्मसमर्पण प्रक्रिया को लेकर कुछ आशंकाएं भी जताई गई हैं, जिनमें आत्मसमर्पण के बाद कानूनी मामलों में फंसाए जाने और कैंपों में रखे जाने का सवाल शामिल है। साथ ही सरकार से तीन घोषणाएं करने का सुझाव दिया गया है—
. सशस्त्र संघर्ष छोड़ने पर माओवादी संगठन को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता।
. माओवादियों पर दर्ज प्रकरणों की वापसी और जेल में बंद सदस्यों की रिहाई।
. संविधान के दायरे में खुला राजनीतिक काम करने की अनुमति।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ पुलिस से अपील
समूह ने यह भी कहा है कि वे वर्तमान में ओडिशा में हैं और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रहे हैं। रास्ते में पुलिस की सर्चिंग/कंबिंग कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया गया है ताकि सदस्य सुरक्षित रूप से आत्मसमर्पण कर सकें। ओडिशा के बलांगीर और बरगढ़ जिलों में भी ऑपरेशन रोकने की मांग की गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि यह आत्मसमर्पण होता है तो यह सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जाएगा। फिलहाल सबकी नजरें राज्य सरकार और गृह विभाग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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