भरत भारद्वाज
फरसगांव :- देवी – देवताओं की धार्मिक आस्था के लिए पूरे विश्व में प्रख्यात बस्तर के खूबसूरत वादियों में शिवलिंग के अवतार में माता लिंगेश्वरी विराजमान है जो पहाड़ों के बीच एक गुफा में माँ लिंगेश्वरी विराजमान हैं, जहां हर वर्ष हजारो की संख्या में भक्त अलग अलग राज्यो से मन्नत की कामना लिए दर्शन करने आते है , जिसमे अधिकांश निशांत दम्पति सन्तान प्राप्ति के लिए यह आते हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष की मंदिर समिति के पुजारियों द्वारा लिंगेश्वरी मां की विधिविधान पूर्वक पुजा अर्चना कर गुफा के सामने रखे के पत्थरों को हटा कर द्वार खोला गया और समिति के पांच पुजारियों द्वारा गुफा में प्रवेश कर माँ लिंगेश्वरी के विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओ को माता के दर्शन हो पाए ।
कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लाक अंतर्गत ग्राम आलोर झाटीबन की पहाड़ी के गुफा में मां लिंगेश्वरी विराजमान हैं। यहां प्रति वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता का दर्शन करने पहुंचते है। इस वर्ष 18 सितम्बर बुधवार को समिति के पुजारियों द्वारा सुबह गुफा मंदिर का द्वार खोला गया,जिसके बाद श्रद्धालुओ को माता के दर्शन करने दिया गया। पीछे वर्ष की तरह इस वर्ष भी भीड़ को देखते हुए दर्शनार्थियों के गुफा मंदिर में प्रवेश करने नही दिया गया सभी गुफा के बाहर से ही माता के दर्शन किये। निःसन्तान दम्पति सन्तान की कामना की मन्नत लेकर पहुचे वही ऐसे श्रद्धालु जिनके मन्नत पूर्ण हुवे वे अपनी संतान के साथ माता के दर्शन करने पहुचे । मंदिर के नीचे हजारों की संख्या में श्रद्धालु कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर माता के दर्शन किये। मन मे भक्ति व मन्नत की आस लिये आये श्रद्धालुओ ने गुफा मुख्य द्वार पर बिनती कर अपनी मन्नत पूर्ण होने की कामना की । इस वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुचे । सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन की कड़ी व्यवस्था की गई थी। वही समिति के लोग भी व्यवस्था में लगे रहे ताकि सभी भक्तों को माता के दर्शन हो सके ।
*गुफा की रेत में दिखे बिल्ली के पदचिह्न, पुजारियों ने बताया अशुभ-अशांति के संकेत-*
गुफा में समिति के सदस्यों द्वारा सुबह विधि विधान से पूजा अर्चना कर मां लिंगेश्वरी गुफा के द्वार को खोले गए। प्रतिवर्ष की भांति गुफा के अंदर प्रवेश कर रेत में पद चिन्हों की खोज शुरू हुई। इस वर्ष गुफा के अंदर रेत पर बिल्ली के पद चिन्ह के निशान मिले। समिति के सदस्यों ने इन पद चिन्हों का मतलब बताया कि बिल्ली के पद चिन्ह अशुभ-अशान्ति के संकेत है।
*प्रतिवर्ष देश भर के हजारो श्रद्धालु करते हैं माता के दर्शन, इस वर्ष दो दिन पहले से ही लगती है कतारें-*
आपको बता दे कि साल में केवल एक दिन के लिए खुलने वाले इस मंदिर में हर वर्ष हजारो की संख्या में सन्तान व अन्य मन्नत की कामना लिए भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। माता के दर्शन करने कई राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, आंध्राप्रदेश , तमिलनाडु , नागपुर, गोवा सहित छग राज्य के सभी जिलों के भक्त अपनी मन्नत लिए आते हैं। जहाँ इस वर्ष मन्दिर खुलने से दो दिन पहले से ही मन्दिर के बाहर भक्तो की लंबी कतार लगना शुरू हो गया। मन्दिर खुलने से पहले ही हजारों की सख्या में भक्तों की भीड़ जमा हो गई । मन्दिर खुलने के बाद भक्तों ने माता के दर्शन कर मन्नत मांगी।
*निःसन्तान दम्पति को माता के आशीर्वाद से होती है संतान- पुजारी*
मां लिंगेश्वरी मंदिर के पुजारी नंदलाल दीवान ने बताया कि इस मंदिर की खासियत यह है, कि जिन दंपतियों को संतान की प्राप्ति नहीं होता है वे लोग माँ लिंगेश्वरी मंदिर में आ कर सच्चे मन से पूजा करते हैं और निसंतान दंपतियों के द्वारा खीरा चढ़ाया जाता है फिर खीरे को पुजारी द्वारा प्रसाद स्वरूपदंपती को देते और दंपति के द्वारा नाखून से खीरे को दो हिस्सा कर खाते है। जिसके बाद ही उन सभी लोगों की मनोकामना पूरी होती है।
समिति के लोगो ने बताया कि किस प्रकार से माता लिंगेश्वरी के इस गुफा में विराजमान होने की जानकारी मिली, उन्होंने बतलाया कि कुछ ग्रामीण लोग खरगोश को पकड़ने उसका पीछा किए तो खरगोश इस गुफा में घुस गया और उसके पीछे ग्रामीण लोग भी घुसे तो गुफा के अंतर शिवलिंग के अवतार में माता लिंगेश्वरी विराजमान दिखीं। जिसके बाद से लोगों ने यहां पूजा अर्चना करना शुरू कर दिया और अब पूरे देश भर से लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।
*हर वर्ष भक्तो की मन्नत होती है पूर्ण-*
आपको को बता दे कि हर वर्ष इस मंदिर को हजारो की संख्या में भक्त अपने मन्नत पूर्ण होने की कामना लिए आते हैं जहाँ हर वर्ष कई भक्तो के मन्नते पूर्ण होते हैं । समिति के लोगो ने बताया की हर वर्ष मन्नत मनाने वाले भक्त समिति के रजिस्टर में अपनी मन्नत दर्ज करवाते हैं और आने वाले साल में मन्नत पूर्ण होने पर अपनी मन्नत पूर्ण होने की जानकारी भी देते हैं। जहाँ हर वर्ष भक्तो की मन्नत पूर्ण होती है । पिछले वर्ष 400 से अधिक भक्तों के मन्नत पूर्ण हुए। इस वर्ष अधिकांश लोग सन्तान प्राप्ति की कामना लिए आते हैं ।
*मन्नत पूर्ण होने पर संतान के साथ माता के दर्शन करने आते है दम्पति -*
मन्नत पूर्ण होने के बाद दम्पति अपनी संतान के साथ माता के दर्शन करने आते है। पाटन के रानितराई डिडगा निवासी श्रीकांत चंद्राकर अपनी पत्नी रीमा चंद्राकर के साथ वर्ष 2022 में माता से मन्नत माँगने आये वर्ष 2023 में उन्हें संतान की प्राप्ती हुई, जिसके बाद इस वर्ष 2024 में अपनी संतान के साथ माता के दर्शन करने पहुचे । वही पाटन के अवसर निवासी प्रवीण शारदे अपनी पत्नी पायल शारदे के साथ वर्ष 2022 में मन्नत लेकर आये थे , माता ने इनकी मन्नत को पूर्ण किया वर्ष 2023 ने इन्हें भी संतान की प्राप्ती हुई, जिसके बाद यह लोग भी इस वर्ष अपनी संतान को लेकर माता के दर्शन करने पहुचे हुए है। इनकी तरह ही जिन जिन भक्तों की मन्नत पूर्ण होती है वे इसी तरह माता के पास आते है।
*संतान प्राप्ति की कामना को लेकर पहुचे कई भक्त -*
इस वर्ष भी सैकड़ो निःसन्तान दम्पति संतान प्राप्ति की कामना को लेकर माता के दर्शन करने पहुचे। इस वर्ष ग्राम अर्जुनी निवासी पीताम्बर साहू अपनी पत्नी के साथ माता के पास संतान प्राप्ति की कामना को लेकर पहुचे,उन्होंने बताया कि उनकी शादी हुए 24 साल हो गए है लेकिन उन्हें आज तक कोई संतान नही है । पिछले वर्ष भी माता के दर्शन करने आये थे यह उनका दूसरा वर्ष है। वही भिलाई निवासी डोमेन्द्र वर्मा अपनी पत्नी मनीता वर्मा भी संतान प्राप्ती की कामना को लेकर माता के पास आये है। बालोंद जिले से उन्मेद्र कुमार साहू भी अपनी पत्नी के साथ माता के पास संतान की कामना को लेकर पहुचे है। इसी तरह सैकड़ो निःसन्तान दम्पति संतान कामना के लेकर पहुचे हुये थे।
