विनोद जैन
बालोद– पर्वाधिराज पर्व पर्युषण का समय शीघ्र ही निकट आ गया है कल 31 अगस्त से पर्युषण पर्व प्रारंभ हो रहा है । जिस तरह शबरी को राम के आने का इंतजार रहता था उसी तरह भव्यआत्माओं को पर्युषण पर्व का इंतजार रहता है ।जिस तरह राजा का स्वागत होता है उसी तरह पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का स्वागत होना चाहिए । महावीर भवन में चल रहे प्रवचन में संत ऋषभ सागर जी महाराज साहब ने उक्ताशय है के विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा की आत्मा की शोभा बढे इसके लिए जो 11 कर्तब्य बताए गए हैं उसका पालन करना चाहिए। तप साधना के माध्यम से हमारी भाव दरिद्रता दूर होनी चाहिए ,और यदि ऐसा नहीं हो रहा तो यह माने की हम कहीं ना कहीं चूक कर रहे हैं। जीव दया ,अनुकंपा ,दान, शील व्रत ,तप सामयिक आदि के माध्यम से परमात्मा की भक्ति की जा सकती है उन्होंने तीर्थ क्षेत्र की महत्ता बताते हुए कहा कि परम आत्माओं ने जिस स्थान पर रहकर तप साधना की एवं मोक्ष को प्राप्त किया उस स्थान का विशेष महत्व होता है। इसलिए सम्मेत शिखर तीर्थ की झांकी बनाकर एवं वहां पर परमात्माओं को विराजमान कर भाव से उनकी आराधना की जाएगी। जिन लोगों ने तीर्थ क्षेत्र में भगवानों को विराजमान करने की बोली ली उनका संघ द्वारा अभिनंदन किया गया ।कल से मोक्ष तप प्रारंभ हो रहा है एवं पोथा जी( धर्मशास्त्र )सौंपने की बोली होगी लाभार्थी को गुरु भगवंतो को पोथाजी सौंपने का सौभाग्य प्राप्त होगा जिससे वे कल्पसूत्र का वाचन करेंगे।
