विनोद जैन
बालोद – मुमुक्षु आत्मायें मोक्ष प्राप्ति के लिए कठिन से कठिन साधना करने को तैयार रहते है।ऐसे ही चरित्र आत्माओं को जानने का प्रयास हम आगम के अंतगड सूत्र के माध्यम से कर रहे हैं।। सुधर्मा स्वामी द्वारा जम्बू स्वामी को बताई गई बातों का इस शास्त्र में वर्णन किया गया है।। महावीर भवन में अंतगड सूत्र का वाचन करते हुए संत ऋषभ सागरजी म सा ने उन सिद्ध बुद्ध आत्माओं का वर्णन किया जिन्होंने जीवन मे काफी कष्ट सहते हुए सिद्धत्व और बुद्धत्व को प्राप्त किया । उन्होंने गजसुकुमाल ,अर्जुनमाली ,अईमुक्ता कुमार के जीवन का वर्णन किया जिन्होंने आत्मा के कल्याण का मार्ग चुना और संयम लेकर कठोर साधना की।उन्होंने कहा कि तप वही कर सकताहै जिसमे शरीर और पदार्थों के प्रति आसक्ति छुटे।हम सुख की अभिलाषा में धर्म करते है लेकिन ज्ञानी पाप से बचने को धर्म मानते हैं ।पाप का पश्याताप करने से भी कर्म कटते है।जीवन मे प्रत्येक चीजों का सदुपयोग किया जाना चाहिए। पानी का सदुपयोग करें,समय का सदुपयोग करें।यदि पूण्य से वैभव प्राप्त हुआ है तो उसका भी सदुपयोग करना चाहिए । कलअरिहंत भगवंतों की स्थापना करके 15 दिनों तक उनकी आराधना की जाएगी।उनके जीवन की साधना ओर गुणोंको अपने भीतरआत्मसात करने के लिए अधिक से अधिक धर्म आराधना की जायेगी। इस हेतु सम्मेदशिखर तीर्थ की झांकी बनाकर भगवान पार्श्वनाथ की बड़ी प्रतिमा एवम 7अन्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी। भगवानो को विराजमान कराने की बोली कि गई।जिन भाग्यशालियों ने बोली ली है वे हैं डॉ प्रदीप जैन,विकास भंसाली,प्रकाश भंसाली,लीला लाले शर्मा एवम ऋषभ चौरड़िया।प्रतिदिन सुबह -शाम आरती पश्चात प्रसाद वितरण किया जाएगा प्रथम दिवस प्रसाद वितरण का लाभ अक्षय निधि तप कर रहे श्राविकाओं ने लिया है।प्रतिदिन प्रसाद वितरण के एवम आरती कराने के भी लाभार्थी बनाये जाएंगे।आज बेरला से आये संगीता जी गोलछा ने 9 उपवास का पचखान लिया।
