विनोद जैन
बालोद – सहजानन्दी चातुर्मास के अवसर पर स्थानीय महावीर भवन में विराजित जैन संत श्री ऋषभ सागर जी ने आज अपने प्रवचन में कहा कि सुंदर घर बनाना हो तो एक अच्छा नक्शा बनाना पड़ता है। इमारत मजबूत बनाना हो तो नीव भी मजबूत बनाना पड़ता है ।इसी तरह एक अच्छा परिवार बनाना है तो उसका भी लक्ष्य निर्धारित करना पड़ता है
हर कोई चाहता है कि उनका परिवार ऐसा बने जहां शांति संस्कार और प्रगति हो किंतु उसके लिए लक्ष्य का निर्धारण करना आवश्यक होता है। बिना लक्ष्य के सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती बच्चे बुराइयां क्यों सीख जाते हैं ,दरअसल जिनका कोई लक्ष्य नहीं होता वह जिस माहौल में रहते हैं उसी के अनुरूप ढल जाते हैं ।बच्चों को संस्कारिक बनाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए एवं उनकी भावनाओं को समझा जाना चाहिए ।लक्ष्य भले ही छोटा हो पर सामर्थ्य के हिसाब से बनाना चाहिए, जिससे कि उसे पूरा किया जा सके। परिवार का लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जिसमें सबका हित निहित हो किसी रथ में चारों दिशाओं में घोड़ों को लगा दिया जाए तो वह आगे नहीं बढ़ सकता। इसी तरह परिवार रूपी रथ को आगे बढ़ाने के लिए विचार रूपी घोड़े को एक दिशा में लगाएं तो ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। परिवार में संवाद का अभाव नहीं होना चाहिए ,गलती का एहसास होने पर क्षमा मांगने की आदत होनी चाहिए तथा हमेशा सकारात्मक भाव रखना चाहिए ,निंदा करने की आदत का त्याग करना चाहिए इससे फायदा यह होगा की परिवार में प्रेम बना रहेगा तथा किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं रहेगी।
सात दिवसीय शिविर का आज 5वां दिन था।प्रवचन के मुख्य बिंदुओं को अधिकतर उपस्थित जन प्रतिदन नोट कर रहे है।
