*बिरसिंहपुर पाली……*
दीपक विश्वकर्मा
उमरिया से शहडोल के बीच निर्माणाधीन एनएच 43 का कार्य 6 साल बाद भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही व लेट-लतीफी इस मार्ग से होकर गुजरने वाले लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। उक्त सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2015 में स्वीकृति मिली थी। जिसके बाद से इस मार्ग से होकर गुजरने वाले व सड़क किनारे के लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और अभी भी उनकी मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। स्थिति यह है कि यहां से सफर करना काफी मुश्किलभरा होता है। धूल का गुबार और हर चार कदम में गड्ढे राहगीरों की समस्या बढ़ा देते हैं। अब जब चार माह समयावधि समाप्त होने के लिए बचे हैं ऐसे में अभी कई जगह सड़क निर्माण कार्य के साथ ही पुल पुलियों का निर्माण कार्य कराया जाना बाकी है। उमरिया से शहडोल तक 333 करोड़ की लागत से 73 किमी. सड़क का निर्माण कराना था। यह काम 2015 से शुरू भी कर दिया गया था लेकिन अब टाइम का कोई ध्यान नही है काफी काम अधूरा है। ऐसा भी नहीं है कि जानकारी अधिकारियों को न हो। कई बार स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया लेकिन कोई प्रभावी पहल नहीं की गई। सबसे ज्यादा दिक्कतें बारिश के दिनों में होती है।
*इस मार्ग से निकलते हैं कलेक्टर कमिश्नर,मंत्री नही पड़ रही किसी की नजर*
गौरतलब हैं कि पाली से पठारी फाटक के बीच स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब है। लगभग 10 से 15 किमी के बीच का सफर बड़ा ही कठिन है । ऊबड़ खाबड़ सड़क के साथ ही उड़ती हुई डस्ट ने लोगों को कई वर्ष से परेशान कर रखा है।वहीं अलग-अलग जगह पर अभी सड़क का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। मोर्चा फाटक से लगे पाली के बीच सड़क का आधा अधूरा कार्य एक वर्ष से लटका हुआ है। जिसके चलते सड़क के किनारे के लोग अच्छा खासा परेशान है। सड़क निर्माण कार्य न होने से परेशान लोगों ने कई बार विरोध भी किया साथ ही जिला प्रशासन से शिकायत भी की है। इसके बाद भी यहां का कार्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
*बदला ठेकेदार, दूसरी कंपनी को दिया काम*
2015 में उमरिया से शहडोल सड़क निर्माण के लिए जीव्हीआर कंपनी को ठेका दिया गया था। उक्त कंपनी द्वारा सड़क कार्य में लगातार लेटलतीफी की जा रही थी। साथ ही काम भी नहीं किया जा रहा था। जिसे देखते हुए वर्ष 2018 में सड़क निर्माण की जिम्मेदारी टीबीसीएल को दी गई। जिसे फरवरी 2020 तक की समयावधि दी गई है। इस समयावधि
*गुणवत्ता पर उठ रहा सवाल फटी हुई रोड में डामर भरकर की जा रही लीपापोती*
एमपीआरडीसी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग के नवीनीकरण हेतु दो अलग अलग कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें पहला कार्य कटनी से उमरिया एवं दूसरा उमरिया से शहडोल मार्ग निर्माण का था। तिरूपति बिल्डकॉन कांस्ट्रक्शन कंपनी उमरिया से शहडोल राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कर रही हैं। तकनीकी मापदण्डों के इतर घटिया सामग्री एवं मिश्रण का इस्तेमाल करते हुए सरकारी राशि की बंदरबाट की जा रही है। इस मामलें में विभाग के आला अधिकारी अपना कमीशन लेकर चुप बैठे हुए है और आम जनता को हो रही असुविधा से किसी को सरोकार नही रह गया है।
*संपदा का अनुचित दोहन कर रहा टीबीसीएल कंपनी*
सड़क निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा सड़क आस-पास के संसाधनों का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिया निर्माण में नदी नालों का पानी बिना अनुमति के इस्तेमाल करने के साथ साथ मिट्टी, मुरूम एवं पत्थरों का इस्तेमाल कर ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब की जा रही है, इसके अलावा आस पास ही मौजूद रेत का भी अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वीकृत किए गए इन कार्यों का टेण्डर उपरांत निर्माण कार्य संबंधित ठेकेदारों द्वारा शुरू किया गया और कटनी से उमरिया मार्ग कथलिया कन्ट्रक्शन द्वारा पूर्ण कर लिया गया, लेकिन उमरिया से शहडोल मार्ग अभी भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
