यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर
उदय नगर वार्ड कांकेर के महिलाओं के द्वारा अपने पति की दीर्घायु एवं सुखी जीवन के लिए वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा अर्चना किया गया
। इस दौरान उदय नगर वार्ड की पार्षद श्रीमती विजयलक्ष्मी कौशिक, रामेश्वरी गौतम, लक्ष्मी ठाकुर, रोमी चौहान, रेणुका सिन्हा, दीप्ति ठाकुर, सीमा गोसाई, अनिता गुप्ता, माही ठाकुर एवं अन्य वार्डवासी उपस्थित रहे।
हिंदू मान्यता के अनुसार वट सावित्री के दिन वट वृक्ष की पूजा करने का तात्पर्य यमराज की पूजा करना है. इस दिन सुहागन महिला अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए यमराज देव को प्रसन्न करती हैं. उनसे कामना करती हैं कि यमराज देव उनके सुहाग को बचा कर रखें।
वट सावित्री व्रत हिन्दू धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु एवं सुखी जीवन के लिए रखती हैं। मान्यता है जो महिलाएं वट सावित्री व्रत का पालन सच्चे मन से करती हैं। उनके जीवनसाथी (पति) की आयु बढ़ती है। सनातन संस्कृति में महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए व्रत-उपवास का पालन करती हैं।
वट सावित्री व्रत का महत्व
यह व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक, पापहारक, दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है। जो स्त्रियां सावित्री व्रत करती हैं वे पुत्र-पौत्र-धन आदि पदार्थों को प्राप्त कर चिरकाल तक पृथ्वी पर सब सुख भोग कर पति के साथ ब्रह्मलोक को प्राप्त करती हैं। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु एवं डालियों में त्रिनेत्रधारी शंकर का निवास होता है एवं इस पेड़ में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना जाता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है अतः संतान प्राप्ति के लिए
इच्छुक महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं। अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस
वृक्ष को अनश्वर माना गया है। वट वृक्ष की छाँव में ही देवी सावित्री ने अपने पति को पुनः
जीवित किया था। इसी मान्यता के आधार पर स्त्रियां अचल सुहाग की प्राप्ति के लिए इस
दिन वरगद के वृक्षों की पूजा करती हैं। देखा जाए तो इस पर्व के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण
का संदेश भी मिलता है। वृक्ष होंगे तो पर्यावरण बचा रहेगा और तभी जीवन संभव है।
